
नई दिल्ली, 22 जनवरी (पीटीआई) — सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वर्ष 2000 के लाल किला हमले के मामले में मौत की सजा पाए लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकवादी मोहम्मद आरिफ की क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई और इस पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया।
इस हमले में तीन भारतीय सेना के जवान शहीद हो गए थे। शीर्ष अदालत ने इससे पहले 3 नवंबर 2022 को आरिफ की पुनर्विचार (रिव्यू) याचिका खारिज कर दी थी।
आरिफ उर्फ अशफाक को अक्टूबर 2005 में ट्रायल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी, जिसे सितंबर 2007 में दिल्ली हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था।
इसके बाद उसने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अगस्त 2011 में शीर्ष अदालत ने भी आरिफ को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा था।
गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत तथा न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और जे.के. महेश्वरी की विशेष पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों पर गौर किया, जिसमें उन सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया गया था जो अपील और रिव्यू याचिका खारिज होने के बाद दिए गए थे।
“नोटिस जारी करें,” मुख्य न्यायाधीश ने कहा।
क्यूरेटिव याचिका किसी भी मुकदमेबाज़ के लिए अंतिम कानूनी उपाय होती है, जब सुप्रीम कोर्ट खुद दो बार—अपील और पुनर्विचार याचिका खारिज करके—फैसले को बरकरार रख चुका हो।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 22 दिसंबर 2000 की रात कुछ घुसपैठियों ने दिल्ली स्थित लाल किले के भीतर उस इलाके में प्रवेश किया, जहां भारतीय सेना की 7 राजपूताना राइफल्स यूनिट तैनात थी, और वहां अंधाधुंध गोलीबारी की।
इस हमले में तीन सेना के जवान मारे गए थे।
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