सबरीमला स्वर्ण हानि मामला: देवस्वोम मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर यूडीएफ ने केरल विधानसभा की कार्यवाही रोकी

**EDS: SCREENGRAB VIA PTI VIDEOS** Thiruvananthapuram: Opposition MLAs hold a banner in protest, demanding the resignation of Kerala Devaswom Minister V N Vasavan over alleged irregularities linked to the gold-clad copper plates at Sabarimala Lord Ayyappa shrine, in Thiruvananthapuram, Tuesday, Oct. 7, 2025. (PTI Photo) (PTI10_07_2025_000206B)

तिरुवनंतपुरम, 22 जनवरी (PTI): सबरीमला मंदिर में कथित रूप से सोना गायब होने के मामले को लेकर गुरुवार को केरल विधानसभा की कार्यवाही बाधित रही। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने राज्य के देवस्वोम मंत्री वी. एन. वासवन के इस्तीफे की मांग करते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

शोक प्रस्तावों और अध्यक्षों के पैनल की घोषणा के बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, नेता प्रतिपक्ष वी. डी. सतीशन ने अध्यक्ष ए. एन. शमसीर को बताया कि सबरीमला स्वर्ण हानि मुद्दे पर यूडीएफ का विरोध पिछले सत्र से ही जारी है, जिसके दौरान विपक्ष ने कार्यवाही का बहिष्कार किया था।

सतीशन ने कहा, “जब तक मंत्री के इस्तीफे की हमारी मांग पर विरोध जारी है, हम सदन की कार्यवाही में सहयोग नहीं कर पाएंगे।”

इसके तुरंत बाद यूडीएफ के विधायक सदन के वेल में पहुंच गए और अध्यक्ष की आसंदी के सामने तख्तियां और एक बैनर लहराने लगे, जिसमें सत्तारूढ़ सीपीआई(एम) पर सबरीमला मंदिर को “लूटने” का आरोप लगाया गया। अध्यक्ष द्वारा बार-बार शांति बनाए रखने और बैनर हटाने के निर्देशों के बावजूद नारेबाजी जारी रही।

इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए संसदीय कार्य एवं आबकारी मंत्री एम. बी. राजेश ने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा से बच रहा है।

उन्होंने कहा, “उनके पास सदन स्थगित करने का प्रस्ताव लाकर चर्चा कराने का विकल्प है, लेकिन वे इससे डरते हैं। इसलिए वे नारेबाजी और तख्तियों का सहारा ले रहे हैं। यह उनकी कायरता को दर्शाता है।”

राजेश ने आगे आरोप लगाया कि ‘भगवान अयप्पा का सोना किसने चुराया’ जैसा नारा यूडीएफ संयोजक अडूर प्रकाश की ओर निर्देशित होना चाहिए और यदि उससे भी संतोष न हो तो कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की ओर। उन्होंने इस विरोध को “नाटक” करार देते हुए कहा कि यह इसलिए किया जा रहा है क्योंकि केरल हाईकोर्ट ने उस अवधि की अनियमितताओं की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का आदेश दिया है, जब राज्य में यूडीएफ सत्ता में था।

उन्होंने यह भी कहा, “तख्तियां और बैनर केवल आपकी बपौती नहीं हैं। कल से हम भी इन्हें दिखा सकते हैं,” और दावा किया कि कथित तौर पर चोरी करने वाले और सोना खरीदने वाले की एक ही तस्वीर में मौजूदगी के सबूत हैं।

राजेश ने रोजगार योजनाओं की बहस को भी इस टकराव में घसीटते हुए कहा कि पहली यूपीए सरकार के दौरान वाम दलों के दबाव में ही मनरेगा लागू किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष, केरल में आजीविका पर मनरेगा की जगह वीबी-आरएएम जी योजना लागू होने के असर पर चर्चा से बचने के लिए सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है।

उन्होंने टिप्पणी की, “विपक्ष एक और गांधी को बचाने के लिए प्रदर्शन कर रहा है। उनके लिए वह गांधी, महात्मा गांधी से ज्यादा महत्वपूर्ण है।”

तनाव तब और बढ़ गया जब सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने हंगामे के बीच जवाब देने की कोशिश करते हुए कांग्रेस पर सोना चुराने का आरोप लगाते हुए नारे लगाए। उन्होंने सोनिया गांधी की गिरफ्तारी और पूछताछ की मांग की, जिससे विपक्ष भड़क उठा।

लगातार नारेबाजी के बीच सत्तारूढ़ मोर्चे के विधायक भी वेल के पास आ गए, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। अव्यवस्था के बावजूद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही जारी रखी, जबकि यूडीएफ देवस्वोम मंत्री वासवन के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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