
नई दिल्ली, 22 जनवरी (पीटीआई) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को दावा किया कि मनरेगा (MGNREGA) को समाप्त करने को लेकर मोदी सरकार के उद्देश्य वही हैं, जो उसने “तीन काले कृषि कानून” लाते समय अपनाए थे। उन्होंने मज़दूरों से किसानों से सीख लेने और वीबी–जी रैम जी (VB–G RAM G) अधिनियम को वापस लेने की मांग को लेकर एकजुट होने का आह्वान किया।
रचनात्मक कांग्रेस द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मनरेगा मज़दूर सम्मेलन को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मनरेगा की मूल अवधारणा गरीबों को अधिकार देने की थी। सम्मेलन में देशभर से आए मज़दूरों ने अपने कार्यस्थलों से मुट्ठीभर मिट्टी लाई, जिसे राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में पौधों में डाला गया, जो एक प्रतीकात्मक कदम था।
गांधी ने कहा कि मनरेगा आंदोलन संविधान और भारत की अवधारणा में विश्वास रखने वाले गरीब लोगों के लिए एक बड़ा अवसर है। अगर वे एकजुट होकर खड़े होते हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पीछे हटेंगे और मनरेगा को फिर से लागू किया जाएगा। इस कार्यक्रम में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और के. सी. वेणुगोपाल, रचनात्मक कांग्रेस के अध्यक्ष संदीप दीक्षित सहित अन्य नेता मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि मनरेगा का विचार यह था कि जिसे भी काम की जरूरत हो, वह सम्मान के साथ काम की मांग कर सके। यह योजना पंचायती राज व्यवस्था के जरिए चलाई जाती थी और इसमें लोगों की आवाज़ तथा अधिकार निहित थे। गरीबों को काम का अधिकार दिया गया था, जिसे अब नरेंद्र मोदी और भाजपा खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसा उनका आरोप था।
राहुल गांधी ने 2020 में लाई गई कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा ने किसानों पर हमला किया था, लेकिन किसानों ने संगठित होकर उन कानूनों को रुकवाया। उन्होंने कहा कि संसद और सड़कों पर किसानों के साथ दबाव बनाकर सरकार को वे कानून वापस लेने पड़े। गांधी ने आरोप लगाया कि अब वही नीति मज़दूरों पर लागू की जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार यह तय करेगी कि किस राज्य को कितना पैसा मिलेगा, कहां काम होगा और मज़दूरों को कितनी मज़दूरी दी जाएगी। उनके अनुसार, भाजपा शासित राज्यों को अधिक और विपक्ष शासित राज्यों को कम धन दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मज़दूरों के अधिकार खत्म किए जा रहे हैं और लाभ ठेकेदारों तथा नौकरशाही को दिया जाएगा।
गांधी ने कहा कि भाजपा की नीतियां देश की संपत्ति और संसाधनों को कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में केंद्रित करने के लिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य दलितों, ओबीसी और आदिवासियों जैसे गरीब तबकों को अमीरों पर निर्भर बनाना है।
उन्होंने कहा कि कृषि कानून, नोटबंदी और दोषपूर्ण जीएसटी सभी संविधान पर हमले थे और अब यह नया कानून भी उसी दिशा में है। गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा संविधान, लोकतंत्र और “एक व्यक्ति–एक वोट” की अवधारणा को खत्म करना चाहती है और देश को आज़ादी से पहले की स्थिति में ले जाना चाहती है।
राहुल गांधी ने कहा कि इन प्रयासों को रोकने का एकमात्र तरीका एकता है। किसानों ने मज़दूरों को रास्ता दिखाया है। अगर मज़दूर एकजुट होकर खड़े होते हैं तो सरकार पीछे हटेगी। उन्होंने कहा कि गरीबों को अब एकजुट होना ही होगा और मनरेगा आंदोलन इस दिशा में एक बड़ा अवसर है।
कांग्रेस ने 10 जनवरी को यूपीए काल की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त किए जाने के विरोध में 45 दिनों का राष्ट्रव्यापी अभियान ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू किया है। पार्टी वीबी–जी रैम जी अधिनियम को वापस लेने और मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल करने की मांग कर रही है।
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