
नई दिल्ली, 22 जनवरी (पीटीआई) – नोएडा के एक टेक पेशेवर की मौत के बाद, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 62 पहचाने गए हॉटस्पॉट और 12 उच्च-जोखिम वाले कॉरिडोर में सुरक्षा उपायों को बढ़ा दिया है, ताकि आगे होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार 16-17 जनवरी की रात सेक्टर 150 के एक निर्माण स्थल के पास जलभराव वाली खाई में गिर जाने के कारण डूब गई थी।
एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस (ट्रैफिक) दिनेश कुमार गुप्ता ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस घातक दुर्घटनाओं की जगहों का विश्लेषण कर रही है और कई नगर निगम एजेंसियों के समन्वय में सुधारात्मक कदम उठा रही है।
गुप्ता ने पीटीआई से कहा, “हम लगातार उन स्थानों पर संयुक्त सर्वेक्षण करते हैं जहाँ घातक दुर्घटनाएँ हुई हैं। इसके आधार पर हमने डार्क स्पॉट्स की पहचान की, लगभग 62 हॉटस्पॉट चिन्हित किए और 12 कॉरिडोर पहचाने।”
उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाले स्थानों पर सड़क इंजीनियरिंग और ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। गुप्ता ने कहा, “हमारा प्रयास है कि ट्रैफिक इंजीनियरिंग उपायों का नगर निगम एजेंसियों के साथ समन्वय किया जाए ताकि जहां आवश्यक हो, वहां बुनियादी ढांचे की समस्याओं को सुधारा जा सके।”
गुप्ता के अनुसार, इन उपायों में बैरिकेड्स, चेतावनी संकेत और सड़क चिन्हों की स्थापना, बेहतर लाइटिंग और इंजीनियरिंग दोषों को दूर करना शामिल है। उन्होंने कहा, “यह एक सतत प्रक्रिया है और हम इसे कई तरीकों से लागू कर रहे हैं।”
ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि यदि कोई नया डार्क स्पॉट पहचाना जाता है तो तुरंत कार्रवाई करें। गुप्ता ने कहा कि विशेष ध्यान रात के समय की सुरक्षा पर दिया जा रहा है, जब दृश्यता संबंधी समस्याएं अक्सर गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं।
विभाग, पीडब्ल्यूडी, एमसीडी, एनडीएमसी और एनएचएआई जैसी एजेंसियों के साथ समन्वय कर बुनियादी ढांचे में कमी को दूर करने का प्रयास कर रहा है।
एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा एक बार की कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसके लिए निरंतर निगरानी और हस्तक्षेप आवश्यक है।
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