नौसेना प्रमुख: महासागर भारत की विकसित भारत@2047 आकांक्षा को आगे बढ़ाएंगे

Ranchi: Chief of Naval Staff Admiral Dinesh Kumar Tripathi being welcomed at the Birsa Munda Airport, in Ranchi, Thursday, Jan. 22, 2026. (PTI Photo) (PTI01_22_2026_000407B)

रांची, 23 जनवरी (PTI) – नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने शुक्रवार को विकसित भारत@2047 की तुलना एक समुद्री यात्रा से करते हुए कहा कि भारत सहित दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं व्यापार और विकास के लिए बड़े पैमाने पर महासागरों पर निर्भर हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया के कुल निर्यात-आयात (EXIM) व्यापार का 90 प्रतिशत समुद्र के रास्ते होता है और भारत के व्यापार का 95 प्रतिशत वॉल्यूम समुद्री मार्गों से होता है, जिससे महासागर विकसित भारत@2047 को हासिल करने का प्रमुख माध्यम बनते हैं।

एडमिरल त्रिपाठी ने CCL के दरभंगा हाउस सम्मेलन कक्ष में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “विकसित भारत@2047 अब केवल एक नीति नहीं रहा, यह एक वास्तविकता बन चुका है और इसे हासिल करने के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय किए जा चुके हैं। जैसा कि हम जानते हैं, हमारे व्यापार का 95 प्रतिशत समुद्री मार्गों से होता है और दुनिया के करीब 90 प्रतिशत व्यापार का वॉल्यूम इन्हीं पर निर्भर है। हमारा देश भौगोलिक रूप से सौभाग्यशाली है क्योंकि तीन ओर से महासागरों से घिरा है और इन्हें किसी भी प्रकार की बाधा से मुक्त रखना हमारी जिम्मेदारी है।”

उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में पहला प्रतिक्रिया बल (फर्स्ट रेस्पॉन्डर) है और आज दुनिया इसे उसी रूप में मान्यता दे रही है।

नौसेना प्रमुख ने जोर देते हुए कहा, “ब्लू इकोनॉमी का वर्तमान में हमारी अर्थव्यवस्था में योगदान केवल 4 प्रतिशत है, जो बहुत कम है। विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप इसे दहाई अंकों तक बढ़ाया जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों का 88 प्रतिशत समुद्र के रास्ते आता है और यदि कच्चे तेल की कीमत प्रति मीट्रिक टन एक अमेरिकी डॉलर भी बढ़ती है, तो भारत को अतिरिक्त 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता है। यही प्रभाव समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।

उन्होंने कहा, “जब म्यांमार में भूकंप आया, तो हम 500 टन राहत सामग्री के साथ सबसे पहले वहां पहुंचे थे और इसी तरह श्रीलंका में हमने 1,000 टन राहत सामग्री पहुंचाई।” उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की मुख्य भूमिका युद्धक क्षमता है, लेकिन उस स्थिति तक पहुंचने से पहले प्रतिरोध (डिटरेंस) सबसे अहम होता है।

उन्होंने आगे कहा कि समुद्री मार्गों में थोड़ी-सी भी बाधा का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

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