
अमरावती, 23 जनवरी (PTI) – केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने शुक्रवार को कहा कि भाजपा के विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित ‘एकात्म मानववाद’ का दर्शन आज भी राष्ट्रीय और वैश्विक चुनौतियों के स्थायी समाधान प्रस्तुत करता है।
भारतीय जनसंघ राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए रेड्डी ने आयोजन स्थल को “पवित्र” बताया और कहा कि इसी स्थान पर 1965 में भी एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के साथ मेल खाता है, जिसे पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है।
उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद रेड्डी ने कहा, “एकात्म मानववाद का दर्शन आज भी प्रासंगिक है और देश तथा दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों के स्थायी समाधान प्रदान करता है।”
उन्होंने बताया कि ठीक 60 वर्ष पहले, 23 जनवरी को ही इसी स्थल पर पहली बार ‘एकात्म मानववाद’ का प्रतिपादन किया गया था, जिसे उन्होंने “ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण” करार दिया।
रेड्डी ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के बाद भी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, श्री अरबिंदो, बाल गंगाधर तिलक और लाला लाजपत राय जैसे राष्ट्रीय नेताओं के विचारों को दरकिनार कर दिया गया, जबकि व्यक्तिवाद, समाजवाद और साम्यवाद जैसी पश्चिमी विचारधाराएं प्रमुख हो गईं।
उन्होंने कहा कि आज भी पूंजीवाद और साम्यवाद को अपनाने वाले देश समस्याओं से जूझ रहे हैं और एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जहां हर कोई अपनी विचारधारा को श्रेष्ठ बताने का दावा करता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय चिंतन, संस्कृति और परंपराओं में निहित एकात्म मानववाद को एक वैकल्पिक विचारधारा के रूप में प्रस्तुत किया, जो राष्ट्र, समाज और मानवता की आवश्यकताओं को संबोधित करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई देश जिन्होंने साम्यवाद को अपनाया था, बाद में उससे पीछे हट गए, जबकि पूंजीवाद का अनुसरण करने वाले देश आज भी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
रेड्डी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने एकात्म मानववाद के सिद्धांतों के आधार पर लंबे समय से चली आ रही राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्य किया है।
एकात्म मानववाद एक सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक दर्शन है, जो मानव जीवन के प्रति समग्र दृष्टिकोण अपनाने की वकालत करता है और व्यक्ति, समाज तथा प्रकृति की आवश्यकताओं के बीच संतुलन पर बल देता है।
यह दर्शन पूंजीवादी व्यक्तिवाद और मार्क्सवादी समाजवाद – दोनों को अस्वीकार करता है तथा स्वदेशी विकास, धर्म आधारित नैतिकता और अंतिम व्यक्ति के उत्थान (अंत्योदय) पर जोर देता है।
आरएसएस के वरिष्ठ कार्यकर्ता रहे उपाध्याय (1916-1968) भारतीय जनसंघ के संस्थापक नेताओं में शामिल थे, जो बाद में भाजपा में परिवर्तित हुआ। वर्ष 1968 में एक रेल यात्रा के दौरान कथित लूट की घटना में उनकी रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। PTI MS SSK
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