हत्या के आरोपी की 7 साल से जेल में बंदी पर ट्रायल में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार से जवाब मांगा

New Delhi: Security heightened outside the Supreme Court, in New Delhi, Monday, Jan. 5, 2026. Supreme Court on Monday refused to grant bail to activists Umar Khalid and Sharjeel Imam in the 2020 Delhi riots conspiracy matter, saying there was a prima facie case against them under the Unlawful Activities (Prevention) Act. (PTI Photo/Atul Yadav)(PTI01_05_2026_000101B)

नई दिल्ली, 25 जनवरी (पीटीआई) — सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के आरोप में गिरफ्तार एक अंडरट्रायल कैदी को जम्मू-कश्मीर में सात साल से जेल में रखे जाने पर नाराजगी जताई है और ट्रायल में हो रही देरी पर सवाल उठाया है।

न्यायमूर्ति जे.बी. परदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि अब तक अभियोजन पक्ष के 19 में से केवल चार गवाहों की ही जांच हो पाई है। अदालत ने जम्मू-कश्मीर सरकार और संबंधित ट्रायल कोर्ट से यह स्पष्ट करने को कहा है कि पिछले सात वर्षों से मुकदमे में देरी क्यों हो रही है।

पीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश वकील से कहा,

“यदि गवाहों की जांच में देरी के लिए उचित कारण नहीं बताए गए तो हम राज्य सरकार और अभियोजन एजेंसी से सख्ती से निपटेंगे। आपको ट्रायल पूरा होने में हुई देरी को उचित ठहराने के लिए संतोषजनक कारण देने होंगे।”

राज्य सरकार के वकील ने हत्या के आरोपी अनूप सिंह द्वारा दायर जमानत याचिका पर राज्य का जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। सिंह पर रणवीर दंड संहिता के तहत हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

शीर्ष अदालत ने 22 जनवरी के अपने आदेश में कहा,

“अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। यह देखकर हम व्यथित हैं कि याचिकाकर्ता 2018 से अंडरट्रायल कैदी के रूप में हिरासत में है। आज तक अभियोजन केवल 19 में से चार गवाहों की ही जांच कर पाया है। ट्रायल में देरी को लेकर राज्य सरकार को जवाब देना होगा।”

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को यह भी निर्देश दिया कि वह संबंधित ट्रायल कोर्ट से यह स्पष्टिकरण मांगे कि मुकदमा पिछले सात वर्षों से लंबित क्यों है और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है।

पीठ ने यह भी नोट किया कि अनूप सिंह को जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया था। यह मामला 18 अक्टूबर 2018 को बारी ब्राह्मणा पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें जिला सांबा (जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश) में रणवीर दंड संहिता की धारा 302 (अब आईपीसी) के तहत अपराध दर्ज किया गया था।

30 जून 2025 को हाई कोर्ट ने सिंह की याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत को निर्देश दिया था कि वह बिना अनावश्यक स्थगन दिए ट्रायल को तेज़ी से पूरा करे।

हाई कोर्ट ने कहा था कि आरोपी ऐसे अपराध में शामिल है, जिसकी सजा आजीवन कारावास हो सकती है, और मामला अभियोजन गवाहों की गवाही के लिए ट्रायल कोर्ट में लंबित है। अदालत ने यह भी कहा था कि याचिकाकर्ता त्वरित सुनवाई का हकदार है और ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह मामले का शीघ्र निपटारा करने का हर संभव प्रयास करे।