
लंदन, 27 जनवरी (एपी): ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं, जिसका उद्देश्य बीजिंग के साथ संबंधों को बेहतर बनाना है, ऐसे समय में जब अमेरिका के साथ रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। बुधवार से शुरू हो रही यह यात्रा 2018 के बाद किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा होगी। इसका मकसद चीनी निवेश, प्रौद्योगिकी और ब्रिटिश वित्तीय सेवाओं, कारों तथा स्कॉच व्हिस्की के लिए बेहतर बाजार पहुंच के जरिए ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है। स्टारमर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे और उनके साथ बिज़नेस सेक्रेटरी पीटर काइल तथा कई कॉरपोरेट नेता भी होंगे।
शंघाई की फुदान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर झाओ मिंगहाओ ने कहा, “चीन अब सिर्फ दुनिया की फैक्ट्री नहीं रहा, बल्कि वह एक वैश्विक बाजार भी बनता जा रहा है।”
स्टारमर का यह रुख ब्रिटेन–चीन संबंधों के उतार-चढ़ाव के बाद सामने आया है। पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के दौर का तथाकथित “गोल्डन एरा” हांगकांग, यूक्रेन युद्ध में रूस को चीन के समर्थन और जासूसी से जुड़ी चिंताओं के चलते खत्म हो गया था। स्टारमर की लेबर सरकार ने अब व्यावहारिक नीति अपनाई है—राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के साथ कूटनीतिक संवाद और आर्थिक सहयोग बनाए रखना।
देश में महंगाई संकट और उम्मीद से धीमी आर्थिक वृद्धि के बीच स्टारमर इस यात्रा से घरेलू स्तर पर भी मजबूती हासिल करना चाहते हैं। जनमत सर्वेक्षणों में उनकी पार्टी लेबर, हार्ड-राइट रिफॉर्म यूके से पीछे चल रही है और कुछ लेबर सांसद उनके नेतृत्व को लेकर चिंतित हैं।
हालांकि, यह दौरा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ रिश्तों में खटास ला सकता है। इससे पहले स्टारमर ने अमेरिका के साथ कामकाजी संबंध बनाए रखने की कोशिश की थी, जिसमें अमेरिकी टैरिफ घटाने वाला एक व्यापार समझौता भी शामिल था। हाल में स्टारमर ने ग्रीनलैंड और नाटो सैनिकों से जुड़े ट्रंप के बयानों की सार्वजनिक आलोचना की थी। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी चीन जा चुके हैं और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भी चीन यात्रा तय है, क्योंकि अमेरिकी सहयोगी ट्रंप की अप्रत्याशित नीतियों को देखते हुए अपने विकल्प तलाश रहे हैं। झाओ के मुताबिक, वाशिंगटन पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिकी सहयोगियों में असहजता बढ़ रही है।
आलोचकों का कहना है कि स्टारमर सरकार चीन से जुड़े सुरक्षा खतरों को लेकर भोली हो सकती है। यह दौरा लंदन के टावर के पास 20,000 वर्ग मीटर के चीनी दूतावास को मंजूरी दिए जाने के बाद हो रहा है, जिसे लेकर जासूसी की आशंकाएं जताई गई हैं। स्टारमर को मॉरीशस को चागोस द्वीप सौंपने के फैसले पर भी सवालों का सामना करना पड़ रहा है, जिसे कुछ लोग चीनी प्रभाव बढ़ने से जोड़कर देख रहे हैं। उइगरों के मानवाधिकार और लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता जिमी लाई की कैद जैसे मुद्दे भी संवेदनशील बने हुए हैं। हांगकांग के पूर्व गवर्नर क्रिस पैटन ने कहा कि स्टारमर को स्पष्ट रूप से ब्रिटेन का रुख बताना चाहिए, साथ ही एक संतुलित संबंध भी बनाए रखना चाहिए।
किंग्स कॉलेज लंदन के केरी ब्राउन ने कहा कि अगर स्टारमर निवेश हासिल कर लेते हैं और राजनीतिक विवादों से बच जाते हैं, तो इस यात्रा को सफल माना जाएगा। उन्होंने कहा, “जहां दोस्ती संभव हो वहां दोस्ती, बाकी मामलों में असहमति पर सहमति।”
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