
बगदाद, 28 जनवरी (एपी): इराक के पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मालिकी ने बुधवार को कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने सत्ता में लौटने पर इराक को दिया जा रहा अमेरिकी समर्थन वापस लेने की बात कही थी।
अल-मालिकी, जिन्हें देश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक गठबंधन ने एक बार फिर प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया है, ने एक बयान में कहा, “हम इराक के आंतरिक मामलों में अमेरिका के खुले हस्तक्षेप को खारिज करते हैं और इसे उसकी संप्रभुता का उल्लंघन मानते हैं।”
मंगलवार को सोशल मीडिया पर ट्रंप ने लिखा था, “पिछली बार जब मालिकी सत्ता में थे, तब देश गरीबी और पूरी अराजकता में डूब गया था।” उन्होंने आगे कहा, “उनकी पागल नीतियों और विचारधाराओं के कारण अगर वे चुने गए, तो संयुक्त राज्य अमेरिका इराक की कोई मदद नहीं करेगा और अगर हम मदद के लिए वहां नहीं होंगे, तो इराक के पास सफलता, समृद्धि या स्वतंत्रता का शून्य मौका होगा।”
वॉशिंगटन इराक पर ईरान से दूरी बनाने का दबाव डालता रहा है और अल-मालिकी को तेहरान के बहुत करीब माना जाता है। उनका पिछला कार्यकाल, जो 2014 में समाप्त हुआ था, उसी दौरान इस्लामिक स्टेट (आईएस) का उदय हुआ था, जिसने देश के बड़े हिस्सों पर कब्जा कर लिया था।
नवंबर में हुए संसदीय चुनावों में कार्यवाहक प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी की सूची को सबसे अधिक सीटें मिली थीं। हालांकि, इस महीने की शुरुआत में उन्होंने पद से हटने का फैसला किया, जिससे अल-मालिकी के लिए रास्ता साफ हो गया। दोनों ही शिया दलों के गठबंधन ‘कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क’ के समर्थन के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे थे, जो संसद का सबसे बड़ा गठबंधन है।
पिछले सप्ताह फ्रेमवर्क ने अल-मालिकी को अपना उम्मीदवार घोषित किया। मंगलवार को राष्ट्रपति के चुनाव के लिए संसद सत्र प्रस्तावित था, जो बाद में कोरम पूरा न होने के कारण रद्द कर दिया गया। नई तारीख अभी तय नहीं की गई है।
अल-मालिकी ने कहा कि वे “राष्ट्रीय जनादेश और कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क के फैसले के सम्मान में” प्रधानमंत्री पद की दौड़ में बने रहेंगे।
इराकी राजनीति में ट्रंप का यह हस्तक्षेप ऐसे समय आया है, जब वे ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों पर विचार कर रहे हैं। साथ ही अमेरिका ने सीरिया के हिरासत केंद्रों से इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों को इराक स्थानांतरित करना भी शुरू कर दिया है।
अल-सुदानी 2022 में कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क के समर्थन से सत्ता में आए थे और अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने ईरान और अमेरिका—दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे। उन्होंने पिछले साल हुए 12-दिवसीय इज़रायल-ईरान युद्ध के दौरान ईरान समर्थक मिलिशियाओं को हस्तक्षेप से रोके रखा था।
इनमें से कुछ मिलिशियाओं ने अल-मालिकी के समर्थन की घोषणा की है। काताइब सैय्यद अल-शुहदा मिलिशिया के कमांडर अबू अलाआ अल-वलाए ने ट्रंप के बयान को “इराकी मामलों में खुला हस्तक्षेप” बताया और कहा कि “वह आपराधिक ट्रंप, जिसने विजय के नेताओं की शारीरिक हत्या की, अब राजनीतिक हत्या दोहराना चाहता है।”
अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने एक ड्रोन हमले का आदेश दिया था, जिसमें ईरान के शक्तिशाली सैन्य नेता जनरल कासिम सुलेमानी और इराक की पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज़ के उपनेता अबू महदी अल-मुहंदिस मारे गए थे। यह बल विभिन्न मिलिशियाओं का एक छत्र संगठन है, जिसमें ईरान समर्थित समूह भी शामिल हैं, और जिसे इस्लामिक स्टेट से लड़ने के लिए गठित किया गया था।
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