
नई दिल्ली, 28 जनवरी (पीटीआई): राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि डीपफेक और गलत सूचना लोकतंत्र और सामाजिक सामंजस्य के लिए गंभीर खतरे बनते जा रहे हैं, और उन्होंने सांसदों से इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा करने का आग्रह किया।
संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एआई के दुरुपयोग से उत्पन्न खतरों को देखते हुए इस मुद्दे को गंभीरता से लेना अनिवार्य है।
राष्ट्रपति ने कहा, “डीपफेक, गलत सूचना और फर्जी सामग्री लोकतंत्र, सामाजिक सामंजस्य और सार्वजनिक विश्वास के लिए गंभीर खतरे बनते जा रहे हैं। यह आवश्यक है कि आप सभी इस गंभीर मुद्दे पर विचार-विमर्श करें।”
उन्होंने कक्षा स्तर पर नवाचार (इनोवेशन) को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया और स्कूलों में विज्ञान, तकनीक और रचनात्मक समस्या समाधान से जल्दी परिचय कराने का समर्थन किया।
राष्ट्रपति ने कहा, “आज तकनीक तेजी से विकसित हो रही है। इसके परिणामस्वरूप, नौकरियों की प्रकृति भी तेज़ी से बदल रही है। इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति को वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है।”
उन्होंने कहा कि स्कूल स्तर से ही बच्चों में तकनीक और नवाचार के लिए सोच विकसित की जा रही है।
“अटल इनोवेशन मिशन इसमें प्रभावी भूमिका निभा रहा है। अब तक देशभर में एक करोड़ से अधिक छात्रों को अटल टिंकरिंग लैब्स से लाभ हुआ है,” राष्ट्रपति ने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसंधान और विकास की संस्कृति को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुर्मू ने कहा कि देश में आईटीआई नेटवर्क को उन्नत करने के लिए 1,000 आईटीआई को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है।
“इस उद्देश्य के लिए पीएम सेतु योजना के तहत 60,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। मेरी सरकार आधुनिक तकनीक के लिए उद्योग-तैयार कार्यबल तैयार कर रही है। अब तक 60,000 युवाओं को सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए प्रशिक्षित किया गया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के क्षेत्र में दस लाख युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।”
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