दिल्ली: तेलंगाना में कुत्तों की हत्या के विरोध में पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने की प्रार्थना सभा

100 stray dogs ”poisoned” to death near Hyderabad, case booked

नई दिल्ली, 28 जनवरी (पीटीआई) तेलंगाना में हाल ही में सामूहिक रूप से समुदायिक कुत्तों की हत्या की घटना पर शोक व्यक्त करने तथा जवाबदेही और न्याय की मांग को लेकर यहां पशु कल्याण कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों ने ‘तेरहवीं’ का आयोजन किया।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह प्रार्थना सभा 27 जनवरी को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित की गई।

इस कार्यक्रम में पशु अधिकार कार्यकर्ता, पर्यावरणविद, पशु देखभालकर्ता, कानूनी विशेषज्ञ और चिंतित नागरिक शामिल हुए।

तेलंगाना के विभिन्न जिलों में जनवरी और दिसंबर में आवारा कुत्तों की सामूहिक हत्या की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें अब तक 1,200 कुत्तों की मौत होने का दावा किया गया है। आशंका जताई जा रही है कि दिसंबर 2025 में हुए ग्राम पंचायत चुनावों से पहले ग्रामीणों से किए गए वादों को पूरा करने और आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के नाम पर ये हत्याएं की गईं।

बयान में कहा गया कि तेलंगाना की इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है और इससे समुदायिक जानवरों के खिलाफ संगठित हिंसा की बढ़ती घटनाओं तथा मौजूदा पशु संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में विफलता उजागर होती है।

‘तेरहवीं’ को स्मरण का एक अवसर होने के साथ-साथ नागरिक आह्वान के रूप में भी बताया गया, जिसका उद्देश्य समुदायिक जानवरों को समाज का अहम हिस्सा मानते हुए यह स्वीकार करना है कि उनके जीवन का भी मूल्य है।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने मौन रखा, मोमबत्तियां जलाईं और प्रार्थनाएं कीं, साथ ही पशु संरक्षण कानूनों के सख्त पालन, मानवीय ढंग से कुत्तों की जनसंख्या प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही की आवश्यकता को दोहराया।

पशु और पर्यावरण अधिकार कार्यकर्ता अजय जो ने कहा, “तेलंगाना में जो हुआ वह क्रूरता की कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि यह संस्थागत उदासीनता और जानवरों के खिलाफ हिंसा के खतरनाक सामान्यीकरण का परिणाम है। यह तेरहवीं एक सशक्त याद दिलाती है कि ये कुत्ते जीवित प्राणी थे, जिन्हें कानून का संरक्षण प्राप्त था, और उनकी मौत के लिए न्याय जरूरी है।”

पर्यावरण कार्यकर्ता तन्नुजा चौहान ने कहा कि इस तरह की घटनाओं के व्यापक नैतिक और पारिस्थितिक प्रभाव होते हैं।

उन्होंने कहा, “समुदायिक जानवर हमारे पारिस्थितिक और सामाजिक ताने-बाने का हिस्सा हैं। जब हम बिना किसी दंड के सामूहिक हत्याओं को होने देते हैं, तो हम केवल जानवरों के साथ ही नहीं, बल्कि एक समाज के रूप में अपनी नैतिक और पर्यावरणीय नींव के साथ भी विफल हो रहे होते हैं।” पीटीआई SGV MPL MPL

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