“नौकरियां, आय और विकास गंवाए”: भारत–ईयू एफटीए पर संदेह जताने को लेकर गोयल ने कांग्रेस पर साधा निशाना

New Delhi: Union Minister for Commerce and Industry Piyush Goyal, right, speaks during a joint press conference on the India-EU Free Trade Agreement, at the National Media Centre, in New Delhi. Foreign Secretary Vikram Misri is also seen. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI01_27_2026_000330B)

नई दिल्ली, 29 जनवरी (पीटीआई): वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को भारत–यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर चिंताएं जताने पर कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह समझौता ‘जीरो-सम’ नहीं, बल्कि ‘विन–विन’ है, जो देश की आर्थिक वृद्धि को गति देगा और कारोबार व लोगों के लिए बड़े अवसर पैदा करेगा।

भारत–ईयू एफटीए पर सहमति बनने के बाद कांग्रेस ने बुधवार को कुछ मुद्दे उठाए थे। इनमें यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) से भारत के एल्युमिनियम और स्टील निर्माताओं को छूट न मिलना, तथा भारत में ईयू के 96 प्रतिशत से अधिक निर्यात पर शुल्क में कटौती या राहत जैसे सवाल शामिल थे।

कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने यह भी कहा कि ईयू के सख्त स्वास्थ्य और उत्पाद सुरक्षा नियम एफटीए के बाद भी भारतीय निर्यात पर लागू रहेंगे। इसके अलावा भारत के ईयू को सबसे बड़े निर्यात—रिफाइंड फ्यूल—को लेकर भी चिंता जताई गई।

रमेश की सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के जवाब में गोयल ने कहा कि यह दिलचस्प है कि जो लोग जमीन से जुड़े न होने के कारण फैसले नहीं ले पाए, वे आज कुछ न करने को ही गुण मान रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि इस खोए हुए अवसर की भारी कीमत भारतीय जनता ने चुकाई है—देश ने बहुमूल्य नौकरियां, आय और विकास गंवाया है—और लोगों ने इस निष्क्रियता को कई बार सजा दी है।

उन्होंने एक्स (X) पर लिखा, “मुझे उम्मीद है कि मेरे मित्र इस नकारात्मक और निराशावादी सोच से बाहर आएंगे, जो हमारी आकांक्षी जनता को दुनिया के साथ व्यापार करने के लिए आगे बढ़ते हुए नहीं देख पाती। उनके लिए अवसर खोलने का काम करें, न कि समृद्धि की राह में रोड़े अटकाएं।”

बिंदुवार जवाब में गोयल ने कहा कि जब पूरी दुनिया इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” बता रही है, तब रमेश इसे बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाना मानते हैं, यह उन्हें हैरान करता है।

उन्होंने कहा, “25 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त जीडीपी, 11 ट्रिलियन डॉलर का संयुक्त वैश्विक व्यापार, 2 अरब लोगों का साझा बाजार और भारत के श्रम-प्रधान निर्यात के 33 अरब डॉलर का पहले ही दिन शून्य हो जाना—क्या यह हाइप है? यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि मेरे मित्र एक बुनियादी तथ्य भूल गए कि हमारी अर्थव्यवस्थाएं काफी हद तक एक-दूसरे की पूरक हैं।”

गोयल ने जोड़ा, “यह जीरो-सम नहीं, बल्कि विन–विन समझौता है, जो हमारी आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देगा और हमारे कारोबार व लोगों के लिए असंख्य अवसर पैदा करेगा।”

मंत्री ने कहा कि सीबीएएम सहित स्टील, एल्युमिनियम और अन्य क्षेत्रों के घरेलू निर्यातकों के हितों को लेकर भारत ने पहले से कहीं अधिक मजबूती से मुद्दा उठाया है और समाधान के रास्ते तलाशे हैं।

उन्होंने कहा, “संवाद, भरोसे और सहयोग के जरिए—‘मेरी ही बात चले’ जैसी अपरिपक्व और कठोर सोच के बजाय—हमने इन जटिल और संवेदनशील विषयों से निपटने के रचनात्मक तरीके खोजे हैं।”

गोयल ने बताया कि यह समझौता भरोसे और पारस्परिक सम्मान पर आधारित दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी है, जो व्यापार मार्गों को मजबूत करेगी।

ऑटो सेक्टर पर उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि मेरे मित्र ऑटो क्षेत्र और हमारी मंशा को समझने के लिए समय देंगे। हमारा कोटा-आधारित, प्रीमियम सेगमेंट पर केंद्रित और चरणबद्ध ऑटो ऑफर (ईआईएफ से ईवी के लिए 5 साल की समय-सीमा के साथ) ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से है।”

उन्होंने कहा कि सीकेडी (कंप्लीटली नॉक्ड डाउन) आयात को उदार बनाने से ईयू के ओईएम भारत में स्थानीय असेंबली लाइनें लगाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। इससे विदेशी ओईएम ‘आयात’ से ‘असेंबली’ और आगे चलकर ‘पूर्ण स्थानीयकरण’ की ओर बढ़ेंगे, क्योंकि वे स्थानीय सप्लाई चेन विकसित करेंगे।

गोयल के अनुसार, इससे उच्चस्तरीय विनिर्माण प्रक्रियाएं, गुणवत्ता मानक और उन्नत आरएंडडी प्रथाएं भारतीय इकोसिस्टम में आएंगी। इससे नई मांग पैदा होगी, उपभोक्ताओं को वैश्विक मॉडलों तक तेज पहुंच के साथ अधिक विकल्प मिलेंगे और सुरक्षा व तकनीकी मानकों में भी सुधार होगा। (पीटीआई)

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