अक्षय पात्र ने दावोस 2026 में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा का संदेश दिया

Akshaya Patra

दावोस/दिल्ली, जनवरी 2026 (पीटीआई):

अक्षय पात्र फाउंडेशन ने विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक 2026 के दौरान दावोस की प्रोमेनेड स्ट्रीट पर राटिया सेंटर के पास स्थापित एक विशेष फूड कियोस्क के माध्यम से ताज़ा पका हुआ, पौष्टिक भोजन परोसते हुए खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।

इस पहल के तहत प्रतिदिन एक हज़ार से अधिक आगंतुकों तक पहुँच बनाई गई, जिससे यह उजागर हुआ कि भोजन संवाद, सहानुभूति और सामूहिक कार्रवाई का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। इस प्रयास ने बच्चों और समुदायों के लिए खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में अक्षय पात्र के कार्यों की ओर वैश्विक नेताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों का ध्यान आकर्षित किया।

कियोस्क का उद्घाटन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक श्री चंद्रजीत बनर्जी ने किया। भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के माननीय केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने कियोस्क का दौरा किया और भोजन की सादगी तथा पोषण मूल्य की सराहना की। स्विट्ज़रलैंड में भारत के उप राजदूत श्री अनूप ढींगरा ने भी कियोस्क का भ्रमण किया। अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता, कारोबारी नेता और नागरिक समाज के प्रतिनिधि कियोस्क पर एकत्र हुए और शून्य से नीचे तापमान के बीच गर्म भारतीय व्यंजनों का आनंद लिया।

कई विशिष्ट आगंतुकों ने अक्षय पात्र के स्कूल मध्याह्न भोजन कार्यक्रम को सड़कों, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी भौतिक अवसंरचना के समान एक महत्वपूर्ण निवेश बताया। उन्होंने कहा कि जहाँ अवसंरचना आर्थिक उत्पादकता को बढ़ावा देती है, वहीं पोषण संज्ञानात्मक विकास, शैक्षणिक परिणामों और दीर्घकालिक मानव पूंजी निर्माण की आधारशिला है, जिसके बिना शिक्षा और विकास पर होने वाला निवेश सीमित लाभ ही दे पाता है।

अक्षय पात्र की इस पहल को सांस्कृतिक कूटनीति के एक सशक्त उदाहरण के रूप में व्यापक सराहना मिली, जिसने वैश्विक प्रतिभागियों को करुणा और सेवा पर आधारित भारत के सभ्यतागत मूल्यों की झलक दिखाई। कियोस्क पर शुरू हुई चर्चाएँ केवल भोजन कार्यक्रमों तक सीमित न रहकर सतत खाद्य प्रणालियों, सार्वजनिक–निजी साझेदारी और किफायती एवं विस्तार योग्य सामाजिक अवसंरचना जैसे व्यापक विषयों तक पहुँचीं।

प्राचीन भारतीय परंपरा अन्नदान (व्यापक भोजन वितरण) के माध्यम से अक्षय पात्र टीम ने दुनिया के सबसे प्रभावशाली वैश्विक मंचों में से एक पर पोषण, शिक्षा और आर्थिक विकास के बीच अंतर्निहित संबंध को रेखांकित किया। दावोस में भोजन परोसने की यह पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं थी, बल्कि इस विश्वास को भी सुदृढ़ करती है कि किसी भी बच्चे को भूख के कारण शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए और पोषण बाल विकास एवं कल्याण की बुनियाद है। फाउंडेशन ने यह पुनः पुष्टि की कि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना राष्ट्र निर्माण और वैश्विक विकास में एक रणनीतिक निवेश है।

पिछले 25 वर्षों से अक्षय पात्र भारत सरकार के प्रमुख पीएम पोषण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू कर रहा है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक दोपहर का भोजन उपलब्ध कराया जाता है। वर्तमान में यह संस्था 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में प्रतिदिन 23 लाख से अधिक बच्चों को भोजन प्रदान करती है और वर्ष 2030 तक 30 लाख बच्चों तक पहुँचने का लक्ष्य रखती है।

दावोस में आयोजित यह भोजन कार्यक्रम वर्ल्ड फूड मूवमेंट (डब्ल्यूएफएम) के सहयोग से किया गया, जो अक्षय पात्र के मॉडल से प्रेरित एक संगठन है और जिसे अमेरिका तथा विश्व भर में छात्रों और समुदायों को पोषण प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। डब्ल्यूएफएम का लक्ष्य वैश्विक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देना है ताकि बच्चे ऊर्जा और आनंद के साथ सीख सकें और समुदायों को आशा एवं गरिमा मिल सके।

अक्षय पात्र और डब्ल्यूएफएम के संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री मधु पंडित दास ने कहा कि यह पहल एक सफल सार्वजनिक–निजी साझेदारी को दर्शाती है, जिसमें तकनीक और सुशासन के माध्यम से बड़े पैमाने पर गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएफएम, अक्षय पात्र के अनुभव से प्राप्त सीख और विशेषज्ञता को अपनी वैश्विक पहलों में लागू करेगा।

ग्लोबल कम्युनिकेशंस एंड स्ट्रेटेजी की कार्यकारी निदेशक श्रीमती नवीन नीरदा दास ने शिखर सम्मेलन के दौरान विश्व भर से आए प्रतिनिधियों को ताज़ा पका भोजन परोसने का अवसर देने के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि दावोस में शुरू हुई रचनात्मक चर्चाओं को बच्चों और समाज के हित में आगे बढ़ाया जाएगा।

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