ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में सबालेंका की नई मानसिकता के सामने रिबाकिना का संकल्प, 2023 की दोबारा भिड़ंत

Aryna Sabalenka of Belarus celebrates after defeating Iva Jovic of the U.S. in their quarterfinal match at the Australian Open tennis championship in Melbourne, Australia, Tuesday, Jan. 27, 2026. AP/PTI(AP01_27_2026_000003B)

मेलबर्न, 30 जनवरी (एपी) — आर्यना सबालेंका जब ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में एलेना रिबाकिना के खिलाफ होने वाले मुकाबले के बारे में गहराई से सोचेंगी, तो उनका ध्यान 2023 की उस ऐतिहासिक जीत पर नहीं होगा। न ही वह अपने करियर के उन चार ग्रैंड स्लैम फाइनल पर ज्यादा ध्यान देंगी, जिन्हें वह जीत चुकी हैं, जिनमें हालिया यूएस ओपन खिताब भी शामिल है। दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी सबालेंका के लिए असली प्रेरणा 2025 में खेले गए और हारे गए पांच फाइनल मुकाबलों से आ रही है।

सबालेंका ने कहा कि अब उन्हें अच्छी तरह समझ आ गया है कि उन फाइनल मैचों में क्या गलत हुआ था। उनके मुताबिक, पिछला साल उनके लिए सीख से भरा रहा और उन्होंने अपने बारे में बहुत कुछ जाना। उन्होंने साफ कहा कि इस सीजन में वह उन गलतियों को दोहरने नहीं देंगी। इन हारों में नवंबर में हुआ डब्ल्यूटीए फाइनल भी शामिल है, जहां वह तीन सेटों में रिबाकिना से हार गई थीं। उस जीत के साथ रिबाकिना ने रिकॉर्ड 5.2 मिलियन डॉलर की इनामी राशि अपने नाम की थी।

पिछले साल ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में सबालेंका को मैडिसन कीज़ के हाथों हार झेलनी पड़ी थी, जिससे मेलबर्न पार्क में उनकी 20 मैचों की जीत का सिलसिला टूट गया था। इसके अलावा, वह फ्रेंच ओपन फाइनल में कोको गॉफ से तीन सेटों में हार गई थीं, हालांकि उससे पहले सेमीफाइनल में उन्होंने रोलां गैरो की लगातार तीन बार की चैंपियन इगा स्वियातेक को हराया था। विंबलडन में उन्हें सेमीफाइनल में अमांडा अनीसिमोवा से हार का सामना करना पड़ा। स्टुटगार्ट और इंडियन वेल्स के फाइनल भी वह जीत नहीं सकीं, हालांकि उस साल उन्होंने कुल चार खिताब जरूर जीते।

सबालेंका का कहना है कि अब वह हर फाइनल में एक अलग मानसिकता के साथ उतरना चाहती हैं। उनके मुताबिक, पहले की निराशाएं इस वजह से पैदा होती थीं क्योंकि वह उस पल की परिस्थितियों को स्वीकार नहीं कर पाती थीं। अब उन्होंने यह सीख लिया है कि झुंझलाहट, गुस्से और ध्यान भटकाने वाली बातों को छोड़कर केवल अगले पॉइंट पर फोकस करना ही सबसे जरूरी है। यह सोच उन्होंने सेमीफाइनल में एलीना स्वितोलिना के खिलाफ दिखायी, जब चौथे गेम में चेयर अंपायर ने उन्हें ‘हिंड्रेंस’ के लिए टोका। इस फैसले से वह सहमत नहीं थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उसी गेम में सर्विस ब्रेक की और मैच पर पूरी तरह नियंत्रण बना लिया।

सबालेंका ने कहा कि फिलहाल उनकी मानसिकता यह है कि फाइनल में चाहे जो भी हो, वह हर हाल में लड़ने के लिए तैयार हैं। उनका मानना है कि जब वह इस सोच के साथ कोर्ट पर उतरती हैं, तभी वह अपना सर्वश्रेष्ठ टेनिस खेल पाती हैं। वह इस समय 11 मैचों की जीत की लय में हैं और उन्होंने सीजन की शुरुआत ब्रिसबेन इंटरनेशनल का खिताब जीतकर की थी। फाइनल तक के सफर में उन्होंने एक भी सेट नहीं गंवाया है, और यही बात रिबाकिना पर भी लागू होती है। किसी ग्रैंड स्लैम में ऐसा 2008 के बाद पहली बार हुआ है।

एक और दिलचस्प संयोग यह है कि एक ही साल के अंत में खेले गए डब्ल्यूटीए फाइनल और अगले साल के पहले ग्रैंड स्लैम फाइनल में वही दो खिलाड़ी आमने-सामने हों। ऐसा आखिरी बार 1999-2000 में हुआ था, जब मार्टिना हिंगिस और लिंडसे डेवनपोर्ट ने यह उपलब्धि हासिल की थी। हिंगिस का नाम इस लिहाज से भी खास है, क्योंकि वह ऑस्ट्रेलियन ओपन में लगातार चार या उससे ज्यादा फाइनल में पहुंचने वाली आखिरी महिला खिलाड़ी हैं। ओपन युग में यह कारनामा केवल एवोन गुलागोंग कॉली ने भी किया है।

सबालेंका ने साफ किया कि वह 2023 के फाइनल को दिमाग में रखकर इस मुकाबले में नहीं उतरेंगी। उनके मुताबिक, वह और रिबाकिना अब पूरी तरह अलग खिलाड़ी हैं। दोनों ने अलग-अलग अनुभव हासिल किए हैं, मानसिक और शारीरिक रूप से पहले से ज्यादा मजबूत हैं और अब बेहतर टेनिस खेल रही हैं। इसलिए वह इस मैच को बिल्कुल नया मुकाबला मानकर खेलेंगी।

दूसरी ओर, मॉस्को में जन्मी लेकिन कजाखस्तान का प्रतिनिधित्व करने वाली रिबाकिना भी इसी तरह की सोच के साथ फाइनल में उतरने जा रही हैं। उन्होंने सेमीफाइनल में जेसिका पेगुला को हराकर फाइनल में जगह बनाई, हालांकि उन्होंने माना कि मैच के अंत में वह दबाव में आ गई थीं। जब वह मैच जीतने के लिए सर्व कर रही थीं, तब वह दो बार ब्रेक हुईं और पहले तथा अंतिम मैच प्वाइंट के बीच लगभग आधा घंटा लग गया।

तीन साल पहले, 2022 की विंबलडन चैंपियन रिबाकिना ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में एकमात्र ग्रैंड स्लैम विजेता के रूप में उतरी थीं। उन्होंने पहला सेट जीता था, लेकिन अंत में उन्हें 4-6, 6-3, 6-4 से हार झेलनी पड़ी। यह उसके बाद उनका पहला ग्रैंड स्लैम फाइनल है। 2024 के विंबलडन को छोड़ दें, तो वह इससे पहले स्लैम टूर्नामेंटों में क्वार्टरफाइनल से आगे सिर्फ एक बार ही पहुंच पाई थीं। इस बार वह डब्ल्यूटीए फाइनल्स की मौजूदा चैंपियन के रूप में ऑस्ट्रेलिया पहुंची हैं।

रिबाकिना ने कहा कि 2023 का फाइनल काफी करीबी था और मैच के दौरान उन्हें कुछ मौके जरूर मिले थे, लेकिन तीसरे सेट के अंत में सबालेंका ने ज्यादा आक्रामक खेल दिखाया और बेहतर सर्व किया। उन्होंने माना कि सबालेंका उस जीत की हकदार थीं। रिबाकिना को उम्मीद है कि पिछले अनुभवों और हालिया मैचों से मिली सीख को वह शनिवार के फाइनल में इस्तेमाल कर पाएंगी और आखिरी पॉइंट तक लड़ेंगी। उनका कहना है कि इस बार वह पूरी कोशिश करेंगी कि नतीजा उनके पक्ष में जाए। (एपी)

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