रमेश ने 1948 के नेहरू और पटेल के मुखर्जी को लिखे पत्र जारी किए, जिनमें RSS और हिंदू महासभा की कड़ी आलोचना

New Delhi: Congress MP Jairam Ramesh during the all-party meeting ahead of the Budget session of Parliament, in New Delhi, Tuesday, Jan. 27, 2026. (PTI Photo/Money Sharma)(PTI01_27_2026_000061B)

नई दिल्ली, 30 जनवरी (पीटीआई)

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को वर्ष 1948 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे गए दो अलग-अलग पत्रों को याद किया और सार्वजनिक किया, जिनमें तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने हिंदू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों की कड़ी आलोचना की थी और उन पर गंभीर सवाल उठाए थे।

कांग्रेस के महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने बताया कि महात्मा गांधी की हत्या से दो दिन पहले जवाहरलाल नेहरू ने मुखर्जी को पत्र लिखा था, जबकि कुछ महीने बाद 18 जुलाई 1948 को सरदार पटेल ने भी मुखर्जी को पत्र लिखा था।

रमेश ने ‘एक्स’ (X) पर लिखा,

“ये दोनों पत्र स्वयंभू राष्ट्रवाद के ठेकेदारों के खिलाफ बेहद कठोर आरोपपत्र हैं। और यह सोचने वाली बात है कि आज लोकसभा का एक सांसद उसी विचारधारा से जुड़ा हुआ है, जिसे स्वयं प्रधानमंत्री का आशीर्वाद प्राप्त है—और जिसने यह कहा था कि वह गांधी और गोडसे में से किसी एक को चुन नहीं सकता। उसकी मानसिकता सब कुछ उजागर कर देती है।”

यह टिप्पणी 2024 में भाजपा सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय के विवादित बयान की ओर इशारा मानी जा रही है।

रमेश ने 30 जनवरी 1948 की रात महात्मा गांधी की हत्या के बाद ऑल इंडिया रेडियो पर दिए गए जवाहरलाल नेहरू के संबोधन का लिंक भी साझा किया।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे अपने पत्र में नेहरू ने कहा था कि हिंदू महासभा ने पुणे, अहमदनगर और दिल्ली में प्रतिबंध आदेशों की अवहेलना करते हुए बैठकें आयोजित की थीं।

नेहरू ने पत्र में लिखा था,

“ऐसे भाषण दिए गए जिनमें कहा गया कि महात्मा गांधी एक बाधा हैं और जितनी जल्दी उनकी मृत्यु हो जाए, देश के लिए उतना ही अच्छा होगा…. आरएसएस ने इससे भी बदतर व्यवहार किया है और हमने इसकी अत्यंत आपत्तिजनक गतिविधियों के बारे में बड़ी मात्रा में जानकारी एकत्र की है…।”

रमेश ने सरदार पटेल के उस पत्र का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें उन्होंने RSS और हिंदू महासभा की गतिविधियों की आलोचना की थी।

गौरतलब है कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रमुख नेता महात्मा गांधी की इसी दिन वर्ष 1948 में नाथूराम गोडसे ने हत्या कर दी थी।

(पीटीआई)