
नई दिल्ली, 30 जनवरी (पीटीआई) — कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि महात्मा गांधी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं, जिसे अलग-अलग समय पर एक साम्राज्य, नफरत की सोच और सत्ता के अहंकार ने मिटाने की कोशिश की, लेकिन वे इसमें असफल रहे।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महात्मा गांधी को “भारत की अमर आत्मा” बताते हुए राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि गांधी ने देश को स्वतंत्रता के साथ-साथ एक मौलिक सिद्धांत भी दिया—कि सत्य की शक्ति, सत्ता की शक्ति से कहीं अधिक होती है।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर हिंदी में पोस्ट करते हुए कहा, “महात्मा गांधी सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सोचने का एक तरीका हैं, जिसे एक साम्राज्य, नफरत की विचारधारा और सत्ता के अहंकार ने अलग-अलग समय पर मिटाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।”
उन्होंने कहा, “राष्ट्रपिता ने हमें आज़ादी के साथ यह मूल सिद्धांत दिया कि सत्य की शक्ति, अधिकार की शक्ति से बड़ी होती है और अहिंसा व साहस, हिंसा और भय से कहीं अधिक प्रभावशाली होते हैं।”
उन्होंने कहा कि यह विचारधारा कभी समाप्त नहीं हो सकती, क्योंकि गांधी भारत की आत्मा में अमर हैं।
महात्मा गांधी द्वारा गाए जाने वाले एक भजन की पंक्तियाँ साझा करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “जिस नफरत ने हमें बापू से अलग किया, उसका समाधान भी बापू के मार्ग में ही है—सत्य का प्रकाश, अहिंसा की शक्ति और प्रेम की करुणा। शहीद दिवस पर राष्ट्रपिता को नमन।” कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी गांधीजी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने 1948 में जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे गए दो पत्रों को याद किया, जिनमें हिंदू महासभा और आरएसएस की गतिविधियों की कड़ी आलोचना की गई थी।
रमेश ने ‘एक्स’ पर कहा, “ये दोनों पत्र स्वयंभू राष्ट्रवादियों के लिए कठोर आरोप-पत्र हैं।” उन्होंने 2024 में भाजपा सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय की विवादित टिप्पणी का परोक्ष संदर्भ देते हुए कहा कि उस विचारधारा से जुड़े एक सांसद का गांधी और गोडसे में फर्क न कर पाना उसकी मानसिकता को उजागर करता है।
रमेश ने 30 जनवरी 1948 की रात महात्मा गांधी की हत्या के बाद नेहरू के आकाशवाणी संबोधन का लिंक भी साझा किया। नेहरू ने अपने पत्र में लिखा था कि हिंदू महासभा ने पुणे, अहमदनगर और दिल्ली में प्रतिबंध आदेशों की अवहेलना करते हुए बैठकें कीं।
पत्र में कहा गया था, “ऐसे भाषण दिए गए जिनमें महात्मा गांधी को बाधा बताया गया और कहा गया कि उनके मरने से देश का भला होगा। आरएसएस का आचरण इससे भी बदतर रहा है और उसकी आपत्तिजनक गतिविधियों के बारे में हमारे पास पर्याप्त जानकारी है।”
रमेश ने पटेल के पत्र का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें उन्होंने आरएसएस और हिंदू महासभा की गतिविधियों की आलोचना की थी।
कांग्रेस महासचिव (संगठन प्रभारी) केसी वेणुगोपाल ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि 1948 में इसी दिन भारत और दुनिया का मार्गदर्शन करने वाली महान आत्मा हमसे छीन ली गई।
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “आज शहीद दिवस पर बापू के सत्य और अहिंसा के शाश्वत संदेशों को याद करें और उस नफरत व हिंसा की संस्कृति से सावधान रहें, जिसने उनके हत्यारों को जन्म दिया।”
वेणुगोपाल ने कहा कि 2026 में भी उनके वैचारिक उत्तराधिकारियों से खतरा बना हुआ है, जो गांधीजी को राष्ट्रीय चेतना से मिटाना चाहते हैं। “सत्ताधारी व्यवस्था में बार-बार हम देखते हैं कि गांधी के हत्यारों का महिमामंडन किया जाता है, नफरत को बढ़ावा दिया जाता है और गांधी के नाम से जुड़ी योजनाओं को समाप्त किया जा रहा है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग भ्रम में हैं कि वे बापू को कमज़ोर कर देंगे, लेकिन गांधी और उनके मूल्य भारत की चेतना में गहराई से रचे-बसे हैं और उन्हें मिटाया नहीं जा सकता।
महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने की थी। भारत इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाता है, ताकि राष्ट्र के सर्वोच्च नेता के जीवन, विरासत और शांति, न्याय व स्वतंत्रता के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान का सम्मान किया जा सके। पीटीआई
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
SEO टैग्स: #स्वदेशी, #समाचार, नफरत की विचारधारा गांधी के विचार को मिटाने में असफल रही: राहुल
