
नई दिल्ली, 30 जनवरी (पीटीआई) — सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फिल्म निर्माता से मारपीट और उगाही के आरोपों से जुड़े मामले में यूट्यूबर और पत्रकार शंकर उर्फ सावुक्कु शंकर पर मद्रास हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई जमानत शर्तों में दखल देने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने शंकर की नई याचिका खारिज करते हुए कहा, “यह व्यक्ति हर हफ्ते हमारे सामने आ रहा है। उसका लैपटॉप जब्त है, वह मजिस्ट्रेट के सामने लैपटॉप रिलीज के लिए आवेदन नहीं करता और सीधे सुप्रीम कोर्ट आ जाता है। उसका फोन जब्त है, फोन की रिहाई के लिए भी वह सुप्रीम कोर्ट ही आता है।”
न्यायमूर्ति दत्ता ने शंकर के वकील बालाजी श्रीनिवासन से कहा कि आरोपी को मामले के गुण-दोष पर नहीं, बल्कि चिकित्सकीय आधार पर जमानत दी गई थी, लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद उसने यूट्यूब पर वीडियो और रील्स बनाना शुरू कर दिया।
पीठ ने कहा, “जमानत पर बाहर आने के बाद आपने रील्स और वीडियो बनाकर यूट्यूब पर डालना शुरू कर दिया। यह जमानत का उद्देश्य नहीं था। हाई कोर्ट ने पाया है कि आप अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर रहे हैं। आपकी जमानत रद्द नहीं की गई है, लेकिन हाई कोर्ट ने शर्तें लगाते हुए लंबित मामलों पर बोलने से मना किया है, फिर भी आप ऐसा कर रहे हैं।”
राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि पुलिस को जांच के लिए शंकर का मोबाइल फोन चाहिए था, जिसे उसने नहीं सौंपा। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने उसी फोन के साथ वीडियो बनाकर सार्वजनिक रूप से दिखाया। उन्होंने यह भी कहा कि जिस अस्पताल जाने के आधार पर अंतरिम जमानत दी गई थी, वहां शंकर गया ही नहीं।
इस पर न्यायमूर्ति शर्मा ने टिप्पणी की, “क्योंकि वह रील्स बनाने में व्यस्त था।”
शंकर के वकील श्रीनिवासन ने कहा कि उनके मुवक्किल को केवल मेडिकल आधार पर जमानत नहीं दी गई थी और हाई कोर्ट ने जमानत देते समय राज्य पुलिस की आलोचना भी की थी। उन्होंने यह भी कहा कि शंकर को बुखार की शिकायत पर डॉक्टर ने ईसीजी कराया था और पूर्व में हृदय संबंधी इतिहास को देखते हुए उसे सरकारी अस्पताल रेफर किया गया था।
न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि यदि वह वास्तव में इतना बीमार था तो उसे संयम दिखाना चाहिए था और यूट्यूब पर वीडियो डालने से पहले स्वस्थ होने पर ध्यान देना चाहिए था।
पीठ ने कहा कि वह जमानत शर्तों में हस्तक्षेप करने के पक्ष में नहीं है और याचिका खारिज कर दी।
इससे पहले 20 जनवरी को भी सुप्रीम कोर्ट ने शंकर की एक अन्य याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उसने चेन्नई स्थित अपने कार्यालय की सील हटाने और जब्त उपकरण लौटाने के निर्देश मांगे थे। अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए शंकर को संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास जाने को कहा था।
मद्रास हाई कोर्ट ने 30 दिसंबर 2025 को सीलिंग आदेश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए शंकर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धाराओं 105–107 के तहत क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट के पास जाने का निर्देश दिया था।
शंकर को 13 दिसंबर को उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था और उन पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उन्होंने एक फिल्म निर्माता से पैसे की उगाही की थी।
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