एससी ने स्कूल जाने वाली छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया; मासिक धर्म स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बताया

New Delhi: A view of Supreme Court of India, in New Delhi, Tuesday, Dec. 16, 2025. (PTI Photo/Shahbaz Khan)(PTI12_16_2025_000045B)

नई दिल्ली, 30 जनवरी (पीटीआई) सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को मुफ्त में बायोडिग्रेडेबल मासिक धर्म सैनिटरी पैड उपलब्ध कराएं। अदालत ने कहा कि मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार संविधान में निहित जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।

न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और आर. महादेवन की पीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी स्कूलों में छात्राओं और छात्रों के लिए अलग-अलग शौचालय हों। पीठ ने कहा कि सभी स्कूलों में, चाहे वे सरकारी हों या निजी प्रबंधन के अधीन, दिव्यांग-अनुकूल शौचालय भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

अदालत ने कहा, “मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।” पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि निजी स्कूल इन सुविधाओं को उपलब्ध कराने में विफल रहते हैं तो उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

पीठ ने यह भी कहा कि यदि सरकारें भी छात्राओं को शौचालय और मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने में विफल रहती हैं तो उन्हें इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।

शीर्ष अदालत ने 10 दिसंबर, 2024 को जया ठाकुर द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस याचिका में कक्षा 6 से 12 तक की किशोर छात्राओं के लिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में केंद्र सरकार की ‘स्कूल जाने वाली छात्राओं के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति’ को पूरे देश में लागू करने की मांग की गई है। पीटीआई

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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