
नई दिल्ली, 30 जनवरी (पीटीआई) प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को कहा कि उसने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक पूर्व सहायक उप निरीक्षक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है, जिस पर अपने सहकर्मियों की सेवानिवृत्ति निधि के 60 लाख रुपये से अधिक की राशि का गबन करने और इस पैसे का इस्तेमाल अपनी शादी व अन्य निजी कामों में करने का आरोप है।
आरोपित अधिकारी का नाम रूप सिंह मीणा है। उसके खिलाफ यह अभियोजन शिकायत (आरोपपत्र) हैदराबाद के रंगारेड्डी स्थित धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की विशेष अदालत में दाखिल की गई है। एजेंसी के बयान के अनुसार, अदालत ने 28 जनवरी को इसका संज्ञान लिया।
कथित धोखाधड़ी के समय एएसआई मीणा हैदराबाद स्थित CISF की राष्ट्रीय औद्योगिक सुरक्षा अकादमी (NISA) में तैनात था। वह उस समय NISA कार्यालय में राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) डेस्क पर हेड कांस्टेबल (क्लर्क) के रूप में कार्यरत था।
ED के अनुसार, मीणा के पास सभी NPS सब्सक्राइबरों—जिसमें सेवारत और सेवानिवृत्त CISF कर्मी शामिल थे—के खातों तक पूरी पहुंच के लिए लॉगइन क्रेडेंशियल थे। आरोप है कि उसने 60,26,321 रुपये की राशि का गबन किया। इसके बाद स्थानीय पुलिस और फिर जून 2025 में CBI द्वारा मामला दर्ज किया गया।
इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए ED ने पूर्व CISF अधिकारी के खिलाफ PMLA के तहत मामला दर्ज किया।
ED ने कहा, “मीणा ने अपने नाम के साथ-साथ परिवार के सदस्यों, दोस्तों और अन्य असंबंधित व्यक्तियों (जो अपने खातों के उपयोग के वास्तविक उद्देश्य से अनजान थे) के नाम पर मौजूद कई बैंक खातों का इस्तेमाल गबन किए गए NPS फंड को धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) करने के लिए किया।”
“अपराध की आय को कई बैंक खातों के जरिए रखा और परत-दर-परत घुमाया गया, जिसके बाद उसे उसके अपने बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया और/या नकद निकासी की गई,” ED ने कहा।
एजेंसी ने आगे बताया कि उसने इन धनराशियों का एक बड़ा हिस्सा अपनी शादी के खर्च, चिकित्सा उपचार, पुराने कर्ज चुकाने, डेयरी व्यवसाय में निवेश और अन्य निजी खर्चों में इस्तेमाल किया।
ED ने पहले मीणा की करीब 80,000 रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की थीं।
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