
नई दिल्ली, 1 फरवरी (पीटीआई)
विपक्षी सांसदों ने रविवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में आम लोगों के लिए कोई ठोस घोषणा नहीं है और इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बेरोज़गारी जैसे बुनियादी मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि यह बजट भाजपा-नेतृत्व वाले एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल का बजट है और यह देश की “शीर्ष 5 प्रतिशत” आबादी के लिए बनाया गया है। उन्होंने सरकार को चुनौती दी कि वह शेष 95 प्रतिशत आबादी की प्रति व्यक्ति आय घोषित करे।
“अगर हालात ऐसे ही चलते रहे तो हमें लोहे पर पीतल चढ़ाकर गहने बनाने पड़ेंगे। यह बजट समझ से परे है। बुनियादी मुद्दों—शिक्षा और स्वास्थ्य—की अनदेखी की गई है। अगर हमें सच में विकसित भारत का सपना देखना है तो शिक्षा क्षेत्र के लिए कहीं अधिक आवंटन करना होगा। यह एक समझ से बाहर बजट है,” अखिलेश यादव ने संसद भवन परिसर में मीडिया से कहा।
उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने अपने पुराने वादे पूरे नहीं किए, उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है? उनका बजट सिर्फ शीर्ष 5 प्रतिशत आबादी के लिए है; आम लोग निराश हैं।”
“वे दावा करते हैं कि 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं… क्या सरकार निचले 95 प्रतिशत लोगों की प्रति व्यक्ति आय बता सकती है?” उन्होंने सवाल किया।
समाजवादी पार्टी की सांसद और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा, “बजट में कुछ खास नहीं है। पहले पूरा परिवार एक साथ बैठकर बजट देखता था। इस बजट में न महिलाओं के लिए कुछ है और न युवाओं के लिए। हम चाहते थे कि सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के लिए बजट बढ़ाए, लेकिन इस बजट में इन क्षेत्रों के लिए कुछ भी नहीं है।”
राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि बजट आय असमानता और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों को संबोधित करने में विफल रहा है।
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “आज का बजट एक बार फिर देश की विशाल आबादी को प्रभावित करने वाले दो सबसे गंभीर मुद्दों—तेजी से बढ़ती आय असमानता और चिंताजनक बेरोज़गारी—को संबोधित करने में असफल रहा है।”
राजद नेता ने कहा, “इन संरचनात्मक संकटों से निपटने के बजाय बजट ने सतही उपायों और भारी-भरकम बयानबाज़ी का सहारा लिया है। शब्दों की यह सजावट एक-दो दिन की सुर्खियां बना सकती है, लेकिन आम लोगों की आर्थिक वास्तविकताओं और चिंताओं में कोई बदलाव नहीं ला सकती।”
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी बजट में बेरोज़गारी जैसे अहम मुद्दों की “अनदेखी” पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा, “इस सरकार का सबसे बड़ा वादा था बेरोज़गारों को नौकरी देना—हर साल दो करोड़ नौकरियां। सरकार अपने 12 साल पूरे करने जा रही है; उन 24 करोड़ नौकरियों का क्या हुआ?”
“सरकार को युवाओं को रोजगार देने की अपनी योजना स्पष्ट रूप से बतानी चाहिए,” उन्होंने कहा।
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