
नई दिल्ली, 1 फरवरी (पीटीआई) “लोकलुभावनवाद से ऊपर लोग” का मंत्र वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लगातार नौवें बजट भाषण की दिशा तय करता नजर आया, जिसमें बिना तामझाम और बिना बयानबाज़ी के घोषणाएं की गईं।
कम से कम दो ऐसे राज्यों में, जहां भाजपा सत्ता हासिल करने की उम्मीद कर रही है और जहां जल्द चुनाव होने वाले हैं, लोकलुभावन घोषणाओं की उम्मीदें सीतारमण के 85 मिनट लंबे भाषण के पूरा होने तक बनी रहीं।
सीतारमण ने कहा, “विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 में हमारे प्रधानमंत्री के साथ कई नवोन्मेषी विचार साझा किए गए, जिन्होंने कई प्रस्तावों को प्रेरित किया है। इसी वजह से यह एक विशिष्ट ‘युवा शक्ति-प्रेरित बजट’ है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार का ‘संकल्प’ गरीबों, वंचितों और पिछड़े वर्गों पर केंद्रित है।
भाषण के दौरान विपक्षी बेंचों से कोई बड़ा व्यवधान नहीं देखने को मिला।
अपने पिछले बजट भाषणों के विपरीत, जिनमें तमिल दोहे शामिल रहते थे, इस बार सीतारमण ने किसी भी भाषा में काव्यात्मक संदर्भों से दूरी बनाए रखी। यह ऐसे समय में हुआ है जब उनके गृह राज्य तमिलनाडु के साथ केरल, पश्चिम बंगाल और असम भी विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रहे हैं।
चुनाव से जुड़ा एकमात्र संकेत यह था कि 60 वर्षीय मंत्री ने कांचीवरम सिल्क साड़ी पहनी थी, जो तमिलनाडु की बुनकरी परंपरा का प्रतीक है।
यह पहला बजट था, जो नए बने कर्तव्य भवन में तैयार किया गया। इससे पहले बजट प्रतिष्ठित राष्ट्रपति भवन के पास स्थित नॉर्थ ब्लॉक में तैयार किया जाता था।
मोदी सरकार में सबसे लंबे समय तक वित्त मंत्री रहने वाली सीतारमण ने कहा, “इस संकल्प को पूरा करने के लिए, और चूंकि यह कर्तव्य भवन में तैयार किया गया पहला बजट है, हम तीन ‘कर्तव्यों’ से प्रेरित हैं।”
ये तीन कर्तव्य हैं— आर्थिक विकास को तेज करना और बनाए रखना, आकांक्षाओं को पूरा करना और क्षमता निर्माण, तथा सबका साथ, सबका विकास।
लोकलुभावन घोषणाओं से दूर यह बजट मुख्य रूप से इन्हीं तीन कर्तव्यों के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा— आर्थिक विकास को गति देना, आकांक्षाओं की पूर्ति और क्षमता निर्माण, और सबका साथ, सबका विकास।
सीतारमण ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा, “माननीय प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने दुविधा के बजाय कार्रवाई, बयानबाज़ी के बजाय सुधार और लोकलुभावनवाद के बजाय लोगों को प्राथमिकता देने का लगातार और निर्णायक रूप से चयन किया है।”
भाषण के अंतिम हिस्से में किसी दोहे के बजाय ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ यानी जीवन की सुगमता का विषय प्रमुख रहा।
उन्होंने कहा, “ऐसे ईमानदार करदाता हैं जो अपने सभी बकाया चुकाकर विवाद सुलझाना चाहते हैं, लेकिन दंड से जुड़ी नकारात्मक छवि उन्हें रोकती है। अब वे दंड के स्थान पर एक अतिरिक्त राशि देकर मामलों को बंद कर सकेंगे।”
इसके साथ ही वित्त मंत्री ने ‘जय हिंद’ के उद्घोष के साथ अपना भाषण समाप्त किया। (पीटीआई) NKD RAM HVA
