
नई दिल्ली, 1 फरवरी (पीटीआई) कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने रविवार को कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 आर्थिक रणनीति और आर्थिक नेतृत्व (इकनॉमिक स्टेट्समैनशिप) की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
यहां एआईसीसी मुख्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है और अपनी “लोगों पर संक्षेपाक्षर (अक्रोनिम) थोपने की पसंदीदा आदत” पर लौट आई हैं।
चिदंबरम ने कहा कि इस साल पेश किया गया केंद्रीय बजट राजकोषीय विवेक और समेकन की दिशा में कोई साहसिक कदम नहीं है। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा 1.5 प्रतिशत पर स्थिर बना हुआ है।
उन्होंने कहा, “उधार लेने और खर्च करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन सरकार को राजकोषीय समेकन कहीं अधिक तेजी से करना चाहिए, न कि जिस रफ्तार से अभी किया जा रहा है।”
चिदंबरम ने कहा कि सरकार ग्रामीण रोजगार योजना के तहत करीब 88,000 करोड़ रुपये खर्च कर साल में औसतन 50 दिनों का रोजगार उपलब्ध करा रही है। उन्होंने सवाल किया कि केवल 95,000 करोड़ रुपये खर्च कर एमजीएनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) की जगह लाए गए वीबी-जी रैम जी (विकसित भारत — रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण) अधिनियम के तहत 125 दिनों का रोजगार देने का वादा कैसे पूरा किया जाएगा।
कई महीनों की कवायद के बाद भी, चिदंबरम ने कहा, संशोधित अनुमानों में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान (4.4 प्रतिशत) पर ही टिका रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए अनुमान है कि राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के केवल 0.1 प्रतिशत तक ही घटेगा।
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र का पूंजीगत व्यय घटा है क्योंकि आम लोगों से जुड़े अहम क्षेत्रों और कार्यक्रमों में धनराशि में कटौती की गई है।
उन्होंने सवाल किया, “यह बजट कहां नौकरियां पैदा करता है और युवाओं को रोजगार के बारे में क्या बताता है?”
चिदंबरम ने आर्थिक सर्वेक्षण और कई जानकार विशेषज्ञों द्वारा चिन्हित कम से कम 10 चुनौतियों का जिक्र किया, जिन्हें मौजूदा बजट में संबोधित नहीं किया गया है।
इनमें अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक शुल्क, जिनसे खासकर निर्यातकों सहित विनिर्माताओं पर दबाव बढ़ा है, और लंबे समय से चले आ रहे व्यापार संघर्ष शामिल हैं, जो निवेश पर असर डालेंगे।
उन्होंने कहा कि बढ़ता व्यापार घाटा, विशेष रूप से चीन के साथ, सकल स्थिर पूंजी निर्माण का निम्न स्तर (लगभग 30 प्रतिशत) और निजी क्षेत्र की निवेश करने में हिचकिचाहट जैसे मुद्दों को भी नजरअंदाज किया गया है।
भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के प्रवाह को लेकर अनिश्चितता और पिछले कई महीनों से जारी विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) के लगातार बहिर्गमन को भी कांग्रेस नेता ने प्रमुख चुनौतियों में गिनाया।
चिदंबरम ने कहा कि वित्त मंत्री के भाषण में इनमें से किसी भी मुद्दे को संबोधित नहीं किया गया।
उन्होंने कहा, “इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं थी कि तालियां औपचारिक सी थीं और अधिकांश श्रोता जल्दी ही उदासीन हो गए। यहां तक कि संसद टीवी का प्रसारण भी कुछ बार बंद हो गया।” (पीटीआई) SKC SKC RUK RUK
