मुंबई, 2 फरवरी (भाषा)। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने बॉम्बे हाईकोर्ट को सूचित किया है कि हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर के निवास ‘सावरकर सदन’ को केंद्रीय संरक्षित स्मारक घोषित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह संरचना 100 साल की आयु की आवश्यकता से कम है।
हालांकि, एएसआई ने सुझाव दिया कि मध्य मुंबई में दादर के शिवाजी पार्क क्षेत्र में इमारत को संरक्षित किया जा सकता है यदि इसे बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की विरासत सूची या राज्य संरक्षित स्मारक सूची में शामिल किया जाए।
एएसआई ने पिछले सप्ताह अपने हलफनामे में कहा कि यह कदम संरचना के विध्वंस को रोकेगा और भविष्य में इसका संरक्षण सुनिश्चित करेगा।
यह हलफनामा एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट अभिनव भारत कांग्रेस द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) के जवाब में दायर किया गया था।
शिवाजी पार्क क्षेत्र में 1938 में निर्मित, सावरकर सदन में हिंदुत्व के विचारक और 1966 में उनकी मृत्यु तक स्वतंत्रता सेनानी रहे।
ऐतिहासिक अभिलेखों से पता चलता है कि इस परिसर में 1940 में सुभाष चंद्र बोस के साथ और 1948 में नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं।
जनहित याचिका में यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि इमारत को “राष्ट्रीय महत्व का स्मारक” घोषित किया जाए।
एएसआई ने अपने जवाब में कहा कि वह केवल राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों या स्थलों का संरक्षण करता है, जिन्हें केंद्र द्वारा प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित घोषित किया गया है।
इसमें यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय महत्व का केंद्रीय संरक्षित स्मारक घोषित करने के लिए एक प्राचीन संरचना 100 साल से अधिक पुरानी होनी चाहिए।
हलफनामे में कहा गया है कि सावरकर सदन एक “महत्वपूर्ण इमारत” है, जिसे मूल रूप से 1938 में ग्राउंड-प्लस-वन बंगले के रूप में बनाया गया था, जिसमें भूतल पर तीन फ्लैट और पहले पर दो फ्लैट थे।
इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा किए जाने की संभावना है। पीटीआई एवीआई एआरयू
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