अवैध बालू खनन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी: यूपी अधिकारियों से एनजीटी

नई दिल्ली, 2 फरवरी (पीटीआई)

अवैध बालू खनन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को अनधिकृत खनन और लघु खनिजों के अवैध परिवहन को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया है।

हरित अधिकरण उत्तर प्रदेश के कानपुर और उन्नाव क्षेत्रों में अवैध बालू खनन से गंगा नदी में हो रहे प्रदूषण को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

16 जनवरी के आदेश में, जो हाल ही में उपलब्ध हुआ, एनजीटी की न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफ़रोज़ अहमद की पीठ ने कहा, “आवेदक ने प्रस्तुत किया है कि पर्यावरणीय स्वीकृति (ईसी) के बिना बालू खनन गतिविधियां की जा रही हैं और जहां ईसी दी भी गई है, वहां खनन पट्टाधारकों द्वारा स्वीकृति की शर्तों का पालन नहीं किया गया, जिससे नदी क्षेत्र को गंभीर क्षति पहुंची है।”

अधिकरण ने नोट किया कि आवेदक ने कानपुर के पास बिल्हौर क्षेत्र में अवैध बालू खनन कर रहे एक निजी व्यक्ति या परियोजना प्रवर्तक का नाम लिया है, जिसने गंगा नदी में एक अनधिकृत पुल का निर्माण किया, जिससे नदी दो धाराओं में बंट गई। यह आसपास के गांवों के लिए खतरनाक बन गया है और पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी हो सकता है।

हालांकि, एक समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अधिकरण ने कहा कि इसमें गंगा नदी में अस्थायी सड़क के अवैध निर्माण जैसा “और भी गंभीर कदाचार” सामने आया है, जिससे नदी की धारा विभाजित हो गई और उसका प्रवाह बाधित हुआ। इसका पर्यावरण पर प्रभाव किसी भी अस्थायी पुल की तुलना में कहीं अधिक गंभीर है।

राज्य के भूविज्ञान एवं खनन विभाग के निदेशक को इस मुद्दे के प्रति “पूरी तरह असंवेदनशील” रहने और “दोषपूर्ण ढंग से अनदेखी” करने के लिए फटकार लगाते हुए अधिकरण ने कहा, “प्राकृतिक नदी चैनलों को थोड़ी-सी राशि खर्च कर नष्ट और सुखाया जा सकता है, लेकिन भारी धनराशि और अन्य बुनियादी संसाधनों से भी उन्हें फिर से बनाया नहीं जा सकता।”

अधिकरण ने कहा, “मौजूदा मामले के तथ्य और परिस्थितियां प्रतिवादी संख्या 2 (परियोजना प्रवर्तक) द्वारा पर्यावरणीय कानूनों/मानकों के गंभीर उल्लंघन और (राज्य के) खनन विभाग तथा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के संबंधित अधिकारियों द्वारा कर्तव्यों में गंभीर लापरवाही को उजागर करती हैं।”

एनजीटी ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि सभी जिलाधिकारियों को उपयुक्त निर्देश जारी किए जाएं, ताकि निष्पादित खनन पट्टे की प्रति तुरंत यूपीपीसीबी के सदस्य सचिव और बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय को भेजी जा सके। अधिकरण ने कहा कि यह पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों के अनुपालन और खनन शुरू करने से पहले अनिवार्य ‘स्थापना की सहमति’ (सीटीई) और ‘संचालन की सहमति’ (सीटीओ) प्राप्त करने को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

अधिकरण ने भूविज्ञान एवं खनन विभाग के निदेशक को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी खनन पट्टों और परमिटों से संबंधित पूरी जानकारी विभाग की वेबसाइट पर अपलोड की जाए। इसके अलावा, यूपीपीसीबी को भी खनन पट्टाधारकों द्वारा सीटीई और सीटीओ के लिए आवेदन और उनकी स्वीकृति से जुड़े विवरण अपलोड करने होंगे।

अधिकरण ने कहा, “अवैध खनन से सख्ती से निपटा जाना चाहिए और इसमें शामिल व्यक्तियों पर बिना किसी रियायत के सभी निर्धारित दुष्परिणाम लागू किए जाने चाहिए। यह स्पष्ट किया जाता है कि कानून के अनुसार अवैध खनन में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है।”

अधिकरण ने विभाग के निदेशक, जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि यूपीपीसीबी से सीटीई या सीटीओ प्राप्त किए बिना किसी भी खनन पट्टाधारक को खनन शुरू करने या जारी रखने की अनुमति न दी जाए।

इसके साथ ही, अधिकरण ने निदेशक और यूपीपीसीबी के सदस्य सचिव को निर्देश दिया कि पट्टे पर दिए गए खनन क्षेत्रों की सैटेलाइट इमेजरी का एक डाटाबेस बनाए रखा जाए, ताकि अस्थायी पुलों, सड़कों या मार्गों के निर्माण जैसी अवैध गतिविधियों का आसानी से पता लगाया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि खनन और उससे संबंधित गतिविधियों के लिए नदी की धाराओं या चैनलों पर कोई अस्थायी पुल या सड़क न बनाई जाए।

अधिकरण ने कहा, “संबंधित जिले के सभी जिलाधिकारियों और आयुक्तों/पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया जाता है कि वे जिले के खनन पट्टा स्थलों पर समय-समय पर अचानक निरीक्षण करें, ताकि अवैध खनन को रोका जा सके और यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं कि लघु खनिजों का कोई अवैध खनन या अवैध परिवहन न हो।”