बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 22 और आतंकियों को मार गिराया, मृतकों की संख्या 177 हुई

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कराची/इस्लामाबाद, 2 फरवरी (पीटीआई) — पाकिस्तान के अशांत दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में समन्वित आतंकी हमलों के बाद चलाए जा रहे अभियान में सुरक्षा बलों ने रातभर में 22 और आतंकवादियों को मार गिराया। इसके साथ ही बीते दो दिनों में मारे गए आतंकियों की कुल संख्या बढ़कर 177 हो गई है, सुरक्षा अधिकारियों ने सोमवार को बताया।

यह आतंक-रोधी अभियान तब शुरू किया गया, जब जातीय बलूच समूहों से जुड़े आतंकियों — जिनमें दो महिला आत्मघाती हमलावर भी शामिल थीं — ने शनिवार तड़के क्वेटा, मस्तूंग, नोशकी, दल्बंदीन, खारान, पंजगुर, तुंप, ग्वादर और पसनी सहित 12 कस्बों में नागरिकों को निशाना बनाते हुए समन्वित हमले किए।

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, बीते दो दिनों में आतंक-रोधी अभियानों में मारे गए आतंकियों की संख्या 177 हो चुकी है।

प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने सोमवार को कहा, “रविवार रात से अब तक सुरक्षा बलों ने 22 और आतंकियों को ढेर किया है।”

उन्होंने बताया कि अब तक 167 शवों को आगे की प्रक्रिया और पहचान के लिए अस्पतालों में भेजा जा चुका है।

रिंद ने कहा कि मारे गए अधिकांश आतंकी बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) से जुड़े थे और उन्हें अन्य विद्रोही संगठनों का भी समर्थन प्राप्त था।

उन्होंने कहा, “इन आतंकियों को पिछले दो दिनों के दौरान या तो हमलों के समय या फिर तब मारा गया, जब सुरक्षा बलों ने उनका पीछा करते हुए सफाई अभियान चलाया।”

रविवार को रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि सुरक्षा बल पूरी तरह तैयार थे और उन्होंने समय पर जवाबी कार्रवाई कर हमलावरों को पीछे धकेला, जिसमें 150 आतंकियों को मार गिराया गया।

पाकिस्तानी सेना और सरकार इन विद्रोही संगठनों या तहरीक-ए-तालिबान से जुड़े आतंकियों को “फितना-अल-हिंदुस्तान” करार देती है — यह शब्द सरकार द्वारा यह दावा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है कि इन आतंकियों को कथित तौर पर भारतीय खुफिया एजेंसियों का समर्थन प्राप्त है।

विभिन्न इलाकों में जारी सफाई अभियानों के चलते क्वेटा, मस्तूंग, कलात, खुज़दार, नोशकी, दल्बंदीन, खारान समेत कई शहरों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई थीं।

बलूचिस्तान के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) हमजा शफकात ने मीडिया को बताया कि ये सेवाएं मंगलवार से बहाल कर दी जाएंगी।

शनिवार को आतंकियों ने प्रांत के 12 कस्बों और शहरों में सुरक्षा एवं सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमले किए थे। अब तक पुलिस, फ्रंटियर कॉर्प्स और अन्य सुरक्षा बलों के कम से कम 17 जवानों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने कहा कि ये हमले प्रतिबंधित बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने किए, जिनमें कम से कम 31 नागरिक भी मारे गए।

जियो न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में बुगती ने उन रिपोर्टों को खारिज किया, जिनमें हमलावरों की संख्या 1,000 से 2,000 बताई गई थी। उन्होंने कहा कि आतंकियों की संख्या 200 से 250 से अधिक नहीं थी।

उन्होंने कहा कि प्रांत में सक्रिय आतंकी नेटवर्क की कुल संख्या 4,000 से 5,000 के बीच आंकी गई है।

सुरक्षा बलों ने पूरे प्रांत में आतंकियों के साथ मुठभेड़ की।

रविवार को बुगती ने स्पष्ट किया कि जब तक विद्रोही संगठन आत्मसमर्पण कर हथियार नहीं डालते, तब तक उन्हें खत्म करने का अभियान जारी रहेगा।

इस्लामाबाद में सीनेट ने बलूचिस्तान में हुए आतंकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया।

प्रस्ताव में सरकार से इन घटनाओं की पारदर्शी, त्वरित और निर्णायक जांच सुनिश्चित करने तथा आतंकवादियों, उनके मददगारों और स्थानीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रायोजकों को कानून के अनुसार न्याय के कटघरे में लाने की मांग की गई।

ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से सटे बलूचिस्तान में लंबे समय से हिंसक विद्रोह जारी है। बलूच विद्रोही समूह पहले भी 60 अरब डॉलर की चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजनाओं को निशाना बनाकर हमले कर चुके हैं।

2025 में बीएलए ने क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस ट्रेन के मार्च महीने में अपहरण की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें 31 नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई थी और 300 से अधिक यात्रियों को बंधक बनाया गया था।