
नई दिल्ली, 4 फरवरी (पीटीआई) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने मंगलवार को कहा कि भारत की कैंसर के खिलाफ लड़ाई वैज्ञानिक कठोरता, करुणामय देखभाल और समावेशी स्वास्थ्य सेवा वितरण द्वारा निर्देशित होगी, ताकि कोई भी मरीज पीछे न छूटे।
विश्व कैंसर दिवस की पूर्व संध्या पर ‘लंग कैंसर उपचार और उपशामक देखभाल: साक्ष्य-आधारित दिशानिर्देश’ जारी करते हुए उन्होंने कहा कि फेफड़ों के कैंसर के प्रबंधन में प्रारंभिक पहचान अब भी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनी हुई है।
मंत्री ने विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली आबादी के बीच रोकथाम और स्क्रीनिंग रणनीतियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने प्रारंभिक निदान, उपचार के परिणामों और दीर्घकालिक जीवन-रक्षा में सुधार के लिए अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक सहयोग के विस्तार के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई।
साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के महत्व को रेखांकित करते हुए नड्डा ने कहा कि भारत को केवल अंतरराष्ट्रीय मॉडलों की नकल नहीं करनी चाहिए, बल्कि स्वदेशी और संदर्भ-विशिष्ट समाधानों के साथ नेतृत्व करना चाहिए।
ऑन्कोलॉजी के प्रमुख विशेषज्ञों और हितधारकों द्वारा विकसित यह दिशानिर्देश दस्तावेज़ नैदानिक निर्णय-निर्माण को सशक्त करने, सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने और उपचार परिणामों में भिन्नताओं को कम करने का प्रयास करता है।
उन्होंने रेखांकित किया कि ये दिशानिर्देश पश्चिमी नैदानिक प्रोटोकॉल पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, देश की स्वास्थ्य सेवा वास्तविकताओं, रोग-भार और संसाधन परिस्थितियों के अनुरूप अपने स्वयं के साक्ष्य-आधारित ढांचे विकसित करने में भारत के नेतृत्व को दर्शाते हैं।
मंत्री ने आगे कहा कि साक्ष्य-आधारित दिशानिर्देश नैदानिक निर्णय-निर्माण की वैधता, विश्वसनीयता और प्रामाणिकता को बढ़ाते हैं, जिससे सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य प्रणालियों में एकसमान, उच्च गुणवत्ता वाली और मरीज-केंद्रित देखभाल सुनिश्चित होती है।
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर), स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय (डीजीएचएस) और साझेदार संस्थानों को बधाई देते हुए नड्डा ने भारत के पहले राष्ट्रीय स्तर पर विकसित साक्ष्य-आधारित कैंसर दिशानिर्देश को तैयार करने में उनके सहयोगात्मक प्रयासों की सराहना की।
नड्डा ने कहा कि ये दिशानिर्देश देशभर में नैदानिक प्रथाओं के मानकीकरण, निर्णय-निर्माण को मजबूत करने और उच्च गुणवत्ता वाली, मरीज-केंद्रित कैंसर देखभाल सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इन दिशानिर्देशों में फेफड़ों के कैंसर के उपचार और उपशामक देखभाल दोनों से संबंधित 15 साक्ष्य-आधारित सिफारिशें शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत पद्धतियों, जिनमें व्यवस्थित साक्ष्य संकलन और भारतीय स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य के अनुरूप संदर्भीकरण शामिल है, के माध्यम से विकसित ये दिशानिर्देश सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में नैदानिक प्रथाओं को मानकीकृत करने, प्रारंभिक निदान और उपचार मार्गों को सुदृढ़ करने तथा उपशामक देखभाल सेवाओं को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखते हैं। पीटीआई पीएलबी एनएसडी एनएसडी
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