आर्थिक साझेदारी और रणनीतिक संबंधों पर ईएएम की अमेरिकी ट्रेजरी सचिव बेसेंट से बातचीत

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image posted on Feb. 4, 2026, External Affairs Minister S. Jaishankar with United States Treasury Secretary Scott Bessent during a meeting, in Washington, US. (@DrSJaishankar/X via PTI Photo) (PTI02_04_2026_000007B)

न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, 4 फरवरी (पीटीआई) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट से मुलाकात की और द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी तथा रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।

जयशंकर ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आज वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट से मिलकर खुशी हुई। भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर उपयोगी चर्चा हुई।”

एक पोस्ट में बेसेंट ने कहा कि उन्हें जयशंकर से मुलाकात का आनंद आया। उन्होंने कहा, “हमारी बातचीत के दौरान आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने के महत्व के साथ-साथ पारस्परिक हित के अन्य राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।”

जयशंकर 2 से 4 फरवरी तक अमेरिका की यात्रा पर हैं और बुधवार को विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा बुलाई गई ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ बैठक में हिस्सा लेंगे।

जयशंकर ने विदेश विभाग में रुबियो के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी की, जिसमें दोनों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए व्यापार समझौते का “स्वागत” किया और महत्वपूर्ण खनिजों की खोज एवं खनन पर द्विपक्षीय सहयोग को “औपचारिक रूप देने” पर भी चर्चा की।

बेसेंट और रुबियो दोनों के साथ जयशंकर की बैठक ऐसे समय हुई है, जब एक दिन पहले ही ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर घोषणा की थी कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं, जिसके तहत वाशिंगटन नई दिल्ली पर लगाए गए पारस्परिक शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा।

बेसेंट भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद की आलोचना करते रहे हैं। पिछले सप्ताह भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते के मद्देनजर उन्होंने यूरोपीय देशों को “बेहद निराशाजनक” बताया था और कहा था कि वे इस व्यापार समझौते के कारण रूस से तेल खरीदने पर भारत पर शुल्क लगाने के मामले में वाशिंगटन का साथ देने को तैयार नहीं हैं।

बेसेंट ने कहा था, “अमेरिका ने रूस का तेल खरीदने पर भारत पर प्रतिबंध लगाया या 25 प्रतिशत शुल्क लगाया। यूरोपीय हमारे साथ जुड़ने को तैयार नहीं थे और बाद में पता चला कि वे यह व्यापार समझौता करना चाहते थे। इसलिए जब भी आप किसी यूरोपीय को यूक्रेनी लोगों के महत्व की बात करते सुनें, तो याद रखें कि उन्होंने यूक्रेनी लोगों से ऊपर व्यापार को रखा। व्यापार — यूरोपीय व्यापार — यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने से अधिक महत्वपूर्ण है।” पीटीआई वाईएएस आरयूके आरयूके

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