नई दिल्ली, 4 फरवरी (पीटीआई) सरकार ने पिछले चार वर्षों में दर्ज 23.61 लाख से अधिक मामलों में साइबर अपराधियों द्वारा ठगी जाने से ₹8,189 करोड़ की राशि बचाई है। यह जानकारी बुधवार को राज्यसभा को दी गई।
लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने बताया कि 2021 से 2025 के बीच गृह मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS) पर 23.61 लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं।
उन्होंने कहा, “I4C के अंतर्गत CFCFRMS को 2021 में वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और ठगों द्वारा धन की निकासी रोकने के लिए शुरू किया गया था। 31.12.2025 तक, 23.61 लाख से अधिक शिकायतों में ₹8,189 करोड़ से अधिक की वित्तीय राशि बचाई गई है।”
मंत्री ने बताया कि नागरिकों को साइबर शिकायतें दर्ज कराने में सहायता के लिए पोर्टल के साथ टोल-फ्री 1930 साइबर हेल्पलाइन भी चालू की गई है।
उन्होंने कहा, “31 दिसंबर 2025 तक, पुलिस अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट किए जाने के आधार पर भारत सरकार ने 12.21 लाख से अधिक सिम कार्ड और 3.03 लाख आईएमईआई ब्लॉक किए हैं।”
रोकथाम के उपायों पर सरकार ने बताया कि सितंबर 2024 में बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से शुरू की गई ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ ने संदिग्ध लेनदेन को रोकने में मदद की है।
मंत्रालय ने कहा, “बैंकों से प्राप्त 21.65 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ता डेटा और 26.48 लाख लेयर-1 म्यूल खातों की जानकारी सहभागी संस्थाओं के साथ साझा की गई, जिसके परिणामस्वरूप ₹9,055.27 करोड़ मूल्य के लेनदेन अस्वीकार किए गए।”
एक अलग उत्तर में मंत्रालय ने बताया कि 2 जनवरी को एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई, जो राष्ट्रीय पोर्टलों के माध्यम से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए “एक समान, पीड़ित-केंद्रित ढांचा” प्रदान करती है।
उत्तर में नवीनतम प्रकाशित एनसीआरबी आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया, जिनके अनुसार साइबर अपराधों में धोखाधड़ी के तहत दर्ज मामलों की संख्या 2021 में 14,007 से बढ़कर 2023 में 19,466 हो गई।
सरकार ने दोहराया कि “पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था राज्य के विषय हैं”, जबकि केंद्र सरकार समन्वय तंत्र और क्षमता-विकास पहलों के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों को पूरक करती रहती है।
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