अमेरिका के साथ व्यापार समझौता भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचाएगा; सरकार कृषि क्षेत्र को नष्ट करना चाहती है: खड़गे

**EDS: SCREENGRAB VIA PTI VIDEOS** New Delhi: Congress President Mallikarjun Kharge addresses a press conference, in New Delhi, Sunday, Feb. 1, 2026. (PTI Photo) (PTI02_01_2026_000524B)

नई दिल्ली, 4 फरवरी (पीटीआई) राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाएगा और सरकार देश के कृषि क्षेत्र को “नष्ट” करना चाहती है।

उच्च सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में सरकार ने सामाजिक न्याय, समानता और संसदीय लोकतंत्र को “बुलडोज” कर दिया है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के तरीके पर सवाल उठाते हुए खड़गे ने कहा कि संसद के सत्र के दौरान सांसदों को इस समझौते की जानकारी भारत सरकार से नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिली, जो भारतीय संसद का अपमान है।

अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रूक रोलिंस के बयान का हवाला देते हुए खड़गे ने कहा, “नया अमेरिका-भारत समझौता अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत के विशाल बाजारों तक पहुंच देगा, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और ग्रामीण अमेरिका में नकदी आएगी।”

“इसका मतलब अमेरिकी किसानों को फायदा होगा,” खड़गे ने कहा।

उन्होंने पूछा, “बताइए, आप (सरकार) किसानों के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं या किसानों के खिलाफ हैं?” यह कहते हुए कि यह समझौता भारतीय किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाएगा, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भारतीय कृषि क्षेत्र को “तबाह” करना चाहती है।

खड़गे ने कहा कि अमेरिका से आयात शून्य शुल्क पर आएगा, जबकि भारत से वहां होने वाले निर्यात पर 18 प्रतिशत शुल्क लगेगा।

“यह तथ्य कि सांसदों को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की जानकारी सरकार के बजाय राष्ट्रपति ट्रंप से मिली, संसद का अपमान है,” उन्होंने कहा और आरोप लगाया कि ट्रंप अमेरिका से बैठकर यह बता रहे हैं कि भारत को क्या करना चाहिए और कैसे चलाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारतीय किसान बर्बाद हो जाएंगे।

सोमवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में घोषणा की थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टेलीफोन पर बातचीत के बाद भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं, जिसके तहत वॉशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर लगाए जाने वाले प्रतिशोधात्मक शुल्क को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा।

अपने भाषण में खड़गे ने कहा कि राष्ट्रपति का अभिभाषण कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मौन है और उन्होंने सामाजिक न्याय, सामाजिक सौहार्द, संवैधानिक लोकतंत्र पर हमले, अर्थव्यवस्था, किसानों और मजदूरों की कठिनाइयों तथा विदेश नीति में सरकार की कमियों के मुद्दे उठाए।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश के सामने दो सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य सामाजिक न्याय और समानता की व्यवस्था स्थापित करना तथा संसदीय लोकतंत्र देना था, लेकिन “11 वर्षों में आपने दोनों को बुलडोज कर दिया।”

खड़गे ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने संविधान के चार स्तंभ — न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व — को कमजोर किया है और सामाजिक न्याय के ताने-बाने को क्षति पहुंचाई है।

महिला आरक्षण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में इसका उल्लेख तो है, लेकिन हकीकत में महिलाएं केवल भाजपा के लिए वोट बैंक बनकर रह गई हैं। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री वास्तव में महिला आरक्षण को लेकर गंभीर होते, तो महिला आरक्षण अधिनियम को बिना शर्त लागू किया जाता।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनडीए शासन में अल्पसंख्यकों, आदिवासियों और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार बढ़े हैं। कांग्रेस सरकार द्वारा अनुसूचित जाति और जनजाति के उत्थान के लिए शुरू की गई कई योजनाओं को मौजूदा सरकार ने या तो बंद कर दिया है या उनके लिए धन आवंटन घटा दिया है।

खड़गे ने मनरेगा सहित कई कानूनों को “उखाड़ फेंकने” के लिए सरकार की आलोचना की, जो नागरिकों को बुनियादी अधिकार और कल्याण प्रदान करने के उद्देश्य से बनाए गए थे।

सामाजिक सौहार्द पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मणिपुर का जिक्र किए बिना कोई भी चर्चा अधूरी है, जहां कम से कम 200 लोगों की मौत हुई और 70,000 लोग विस्थापित हुए हैं।

“आपने मणिपुर को एक सैन्यीकृत क्षेत्र बना दिया है,” उन्होंने कहा और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को संकटग्रस्त राज्य का दौरा करने में दो साल लग गए।

खड़गे ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और कई राज्यों में चर्चों पर हमलों पर भी चिंता जताई तथा भाजपा प्रवक्ताओं पर नफरत फैलाने का आरोप लगाया।

उन्होंने पूछा, “क्या आप नफरत और विभाजन की नींव पर विकसित भारत बनाना चाहते हैं?”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार संसद में विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज कर रही है, शॉर्ट-नोटिस प्रश्नों और आधे घंटे की चर्चाओं को खारिज किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए खड़गे ने कहा कि वे संसद में सवालों के जवाब देने से बचते हैं और विपक्ष के कई सवालों को तुच्छ आधार पर खारिज कर दिया जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना चर्चा और उचित संसदीय जांच के नए कानून थोपना चाहती है और गैर-एनडीए शासित राज्यों में राजभवन भाजपा और आरएसएस के दफ्तर बन गए हैं, जहां राज्यपाल केंद्र के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं।

असमानता का मुद्दा उठाते हुए खड़गे ने वर्ल्ड इनइक्वालिटी रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि भारत की कुल संपत्ति का 40 प्रतिशत केवल 1 प्रतिशत आबादी के पास है। उन्होंने पूछा कि सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं।

उन्होंने युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, सरकारी विभागों और पीएसयू में बड़े पैमाने पर रिक्त पदों तथा गुजरात के बंदरगाहों से बढ़ती नशीले पदार्थों की बरामदगी पर भी चिंता जताई।

नए श्रम कानूनों पर हमला करते हुए खड़गे ने कहा कि सरकार ने अपने “कॉरपोरेट मित्रों” को लाभ पहुंचाने के लिए स्वतंत्रता से पहले और बाद में बने उन कानूनों को खत्म कर दिया, जो “मजदूरों के भविष्य की गारंटी देते थे।”

सरकार के ‘अच्छे दिन’ के नारे पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदूषण के धुएं के कारण ‘अच्छे दिन’ दिखाई नहीं देते और 11 वर्षों की विफल रणनीति के चलते लोगों को एयर प्यूरीफायर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

“जो लोग ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की बात करते हैं, वे ईज ऑफ ब्रीदिंग नहीं दे पा रहे हैं,” खड़गे ने कहा।