न्यूयॉर्क, 5 फरवरी (एपी) नग्न तस्वीरें। यौन शोषण की शिकार पीड़ितों के नाम और चेहरे। बैंक खातों और सोशल सिक्योरिटी नंबर पूरे के पूरे दिखाई दे रहे हैं।
ये सभी चीजें उन भारी-भरकम दस्तावेज़ों में सामने आईं, जिन्हें अमेरिकी न्याय विभाग ने जेफ्री एपस्टीन से जुड़े अपने जांच रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के कानून का पालन करते हुए जारी किया।
इस कानून का उद्देश्य एपस्टीन की पीड़िताओं की गोपनीयता की रक्षा करना था। दस्तावेज़ों में उनके नाम काले स्याही से ढके जाने थे और तस्वीरों में उनके चेहरे व शरीर को धुंधला किया जाना था।
लेकिन ऐसा करने में व्यापक स्तर पर चूक हुई है। एसोसिएटेड प्रेस और अन्य समाचार संगठनों की समीक्षा में लापरवाही, असंगत या बिल्कुल न किए गए रेडैक्शन के अनगिनत उदाहरण मिले हैं, जिनसे संवेदनशील निजी जानकारी उजागर हो गई।
फ्लोरिडा में एपस्टीन के लिए यौन प्रकृति की मालिश देने के लिए नियुक्त की गई एक नाबालिग लड़की की तस्वीर कथित पीड़ितों की सूची वाले एक चार्ट में दिखाई दी। पुलिस रिपोर्टें, जिनमें उसकी कई पीड़िताओं के नाम थे — जिनमें कुछ ऐसी महिलाएं भी शामिल हैं जिन्होंने कभी सार्वजनिक रूप से अपनी पहचान उजागर नहीं की — बिना किसी रेडैक्शन के जारी कर दी गईं।
न्याय विभाग की गलतियों को सुधारने की कोशिशों के बावजूद, बुधवार शाम तक वेबसाइट पर एक अर्धनग्न महिला की तस्वीर मौजूद रही, जिसमें उसका चेहरा पूरी तरह स्पष्ट था।
इस सप्ताह कुछ आरोप लगाने वालों और उनके वकीलों ने न्याय विभाग से वेबसाइट हटाने और आगे की गलतियों को रोकने के लिए एक स्वतंत्र निगरानीकर्ता नियुक्त करने की मांग की।
न्यूयॉर्क में एक जज ने बुधवार के लिए सुनवाई तय की थी, लेकिन पीड़ितों के एक वकील द्वारा मुद्दों के समाधान में प्रगति का हवाला देने के बाद उसे रद्द कर दिया गया। हालांकि, उसी वकील ब्रिटनी हेंडरसन ने कहा कि वे कुछ महिलाओं को हुई “स्थायी और अपूरणीय” क्षति के समाधान के लिए “सभी संभावित कानूनी विकल्पों” पर विचार कर रहे हैं।
उन्होंने बुधवार को एक बयान में कहा, “यह विफलता केवल तकनीकी नहीं है। यह उन इंसानों की रक्षा करने में विफलता है, जिन्हें हमारी सरकार ने सुरक्षा का वादा किया था। जब तक हर दस्तावेज़ को सही तरीके से रेडैक्ट नहीं किया जाता, यह विफलता जारी रहेगी।”
एनी फार्मर, जिन्होंने कहा कि जब वे 16 वर्ष की थीं तब एपस्टीन और उसकी सहयोगी गिस्लेन मैक्सवेल ने उनका यौन उत्पीड़न किया था, ने बताया कि उनका नाम पहले से सार्वजनिक है, लेकिन अन्य निजी जानकारियां — जैसे जन्मतिथि और फोन नंबर — दस्तावेज़ों में गलत तरीके से उजागर हो गईं।
उन्होंने एनबीसी न्यूज से कहा, “इस समय मैं सबसे ज़्यादा गुस्सा इस बात पर हूं कि यह सब जिस तरह से हुआ। इतनी लापरवाही से किया गया, जिससे लोगों की जान तक खतरे में पड़ गई, यह वाकई भयावह है।”
एपस्टीन फाइलों के रेडैक्शन प्रयासों का ट्रंप प्रशासन ने किया बचाव
न्याय विभाग ने इन समस्याओं के लिए तकनीकी या मानवीय त्रुटियों को जिम्मेदार ठहराया है और कहा है कि उसने कई आपत्तिजनक सामग्री हटा दी हैं तथा सही तरीके से रेडैक्ट किए गए संस्करण दोबारा प्रकाशित करने पर काम कर रहा है।
लाखों पन्नों की समीक्षा और उन्हें काला करने का काम बहुत कम समय में किया गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 नवंबर को दस्तावेज़ सार्वजनिक करने का कानून साइन किया था। इस कानून ने न्याय विभाग को फाइलें जारी करने के लिए सिर्फ 30 दिन का समय दिया। विभाग इस समयसीमा को पूरा नहीं कर पाया, क्योंकि उसके अनुसार गोपनीयता सुरक्षा का पालन करने के लिए और समय चाहिए था।
सैकड़ों वकीलों को, जो सामान्यतः आपराधिक मामलों की निगरानी करते थे, इस दस्तावेज़ समीक्षा कार्य में लगाया गया — यहां तक कि न्यूयॉर्क में कम से कम एक जज ने शिकायत की कि इससे अन्य मामलों में देरी हो रही है।
न्याय विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध यह डेटाबेस एपस्टीन से जुड़ी वर्षों लंबी जांचों में अब तक की सबसे बड़ी फाइल रिलीज़ है। एपस्टीन ने 2019 में न्यूयॉर्क की एक जेल में आत्महत्या कर ली थी, जब वह संघीय सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों पर मुकदमे का इंतजार कर रहा था।
एपस्टीन फाइलों में अधूरे या छूटे रेडैक्शन की भरमार
एसोसिएटेड प्रेस के पत्रकारों द्वारा दस्तावेज़ों के विश्लेषण में अब तक कई ऐसे उदाहरण मिले हैं, जिनमें संभावित पीड़ितों के नाम और अन्य निजी जानकारियां उजागर हुई हैं।
इसके साथ ही, अत्यधिक रेडैक्शन के भी कई मामले सामने आए हैं।
एक समाचार कटिंग में, न्याय विभाग ने कैलिफोर्निया के एक चर्च में बने जन्म दृश्य के फोटो कैप्शन से “जोसेफ” नाम को काला कर दिया। कैप्शन में लिखा था, “यीशु, मैरी और (रेडैक्टेड) को दर्शाता एक जन्म दृश्य।”
एक ईमेल में, एक कुत्ते का नाम भी रेडैक्ट किया गया प्रतीत होता है:
“मैंने एक घंटा (रेडैक्टेड) को टहलाने में बिताया और फिर एक घंटा उसे नहलाने, ब्लो ड्राई करने और ब्रश करने में। उम्मीद है अब उसकी खुशबू बेहतर होगी!!”
न्याय विभाग का कहना है कि फाइलें तैयार करने वाले कर्मचारियों को केवल पीड़ितों और उनके परिवारों से जुड़ी जानकारी ही रेडैक्ट करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कई दस्तावेज़ों में वकीलों और सार्वजनिक हस्तियों सहित अन्य कई लोगों के नाम भी काले कर दिए गए।
तस्वीरें अब भी बिना सेंसर
न्याय विभाग ने कहा है कि उसका इरादा किसी भी ऐसी तस्वीर के हिस्से को काला करने का था, जिसमें नग्नता हो या जो किसी संभावित पीड़िता को दिखा सकती हो।
एपी द्वारा देखी गई कुछ तस्वीरों में चेहरों को तो ढका गया, लेकिन शरीर के अन्य खुले हिस्से ऐसे ही छोड़ दिए गए, जिससे महिलाओं को फिर भी शर्मिंदगी हो सकती है। तस्वीरों में पहचान योग्य महिलाएं कपड़ों की दुकानों के ट्रायल रूम में कपड़े पहनकर देखती हुई या स्विमसूट में आराम करती दिखीं।
एक युवा महिला की 100 से अधिक तस्वीरों का एक सेट लगभग पूरी तरह काला कर दिया गया था, लेकिन आखिरी तस्वीर में उसका पूरा चेहरा साफ दिखाई दे रहा था। (एपी) आरयूके आरयूके
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