नई दिल्ली, 5 फरवरी (पीटीआई) — निर्वाचन आयोग (ईसी) ने गुरुवार को असम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए तैनात किए जाने वाले अपने सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों को ब्रीफिंग दी।
इन विधानसभाओं का कार्यकाल मई और जून में अलग-अलग तिथियों को समाप्त हो रहा है और चुनाव कार्यक्रम की घोषणा आने वाले हफ्तों में की जा सकती है।
संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20बी के तहत प्रदत्त पूर्ण अधिकारों के अंतर्गत निर्वाचन आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने में सहायता के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करता है।
आयोग ने बताया कि ब्रीफिंग बैठकों के लिए कुल 1,444 अधिकारियों को बुलाया गया था, जिनमें 714 सामान्य पर्यवेक्षक, 233 पुलिस पर्यवेक्षक और 497 व्यय पर्यवेक्षक शामिल थे।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ पर्यवेक्षकों को संबोधित किया।
पर्यवेक्षकों को संबोधित करते हुए सीईसी कुमार ने कहा कि उन्हें निर्वाचन आयोग के “प्रकाश स्तंभ” के रूप में सेवा देने के लिए चुना गया है। उन्होंने कहा कि पर्यवेक्षकों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने चाहिए और उनकी मौजूदगी 824 निर्वाचन क्षेत्रों में पूरी चुनावी मशीनरी को सक्रिय करेगी, जहां मतदान होना है।
संधू ने कहा कि पर्यवेक्षकों को मैदानी स्तर पर चुनाव अधिकारियों के लिए मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनके आगमन का व्यापक प्रचार होना चाहिए और उन्हें सुलभ रहना चाहिए, ताकि मतदाताओं की शिकायतों का त्वरित समाधान हो सके और पक्षपात की कोई धारणा न बने।
जोशी ने कहा कि पर्यवेक्षकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्वाचन आयोग के निर्देशों का अक्षरशः और भावना के अनुरूप पालन हो, तथा निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि मतदाता सूचना पर्चियां (वीआईएस) समय रहते वितरित की जाएं, ताकि मतदान के दिन मतदाताओं को किसी तरह की असुविधा न हो।
आयोग ने पर्यवेक्षकों के साथ शंकानिवारण सत्र में भी बातचीत की।
आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में मतदाता सूची की तैयारी और चुनाव संचालन के विभिन्न पहलुओं पर भी पर्यवेक्षकों को जानकारी दी।
सत्रों के दौरान आईटी अनुप्रयोगों और प्लेटफॉर्मों तथा मीडिया से जुड़े विषयों पर भी उन्हें अवगत कराया गया।
आयोग की “आंख और कान” के रूप में केंद्रीय पर्यवेक्षकों से कहा गया कि वे सभी चुनावी कानूनों, नियमों और दिशानिर्देशों से भली-भांति परिचित हों और उनके सख्त व निष्पक्ष अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए सीधे आयोग को इनपुट दें।
पर्यवेक्षकों को राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए पूरी तरह सुलभ रहने और मतदाताओं की शिकायतों का तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए गए।
उन्हें मतदान केंद्रों का दौरा करने और मतदाताओं की सुविधा के लिए आयोग द्वारा हाल में की गई पहलों के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने, विशेष रूप से सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाओं (एएमएफ) की उपलब्धता पर ध्यान देने को भी कहा गया। (पीटीआई)

