अल फला यूनिवर्सिटी ने छात्रों को आकर्षित करने के लिए ‘समाप्त’ मान्यता का किया इस्तेमाल, चेयरमैन न्यायिक हिरासत में: पुलिस

Faridabad: Media persons outside the Al Falah School of Medical Sciences and Research Centre, in Faridabad, Haryana, Tuesday, Nov. 18, 2025. The Enforcement Directorate on Tuesday launched searches against the Al Falah University of Faridabad and linked persons as part of its investigation related to the Delhi blast case. (PTI Photo)(PTI11_18_2025_000108B)

नई दिल्ली, 5 फरवरी (पीटीआई) — फरीदाबाद स्थित अल फला यूनिवर्सिटी की मान्यता वर्ष 2018 में समाप्त हो गई थी, लेकिन विश्वविद्यालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट और अन्य प्लेटफॉर्म से समाप्त हो चुकी यूजीसी (UGC) मान्यता को नहीं हटाया और इसी आधार पर छात्रों को दाखिले के लिए आमंत्रित करता रहा, एक पुलिस अधिकारी ने गुरुवार को बताया।

यह जानकारी विश्वविद्यालय के चेयरमैन जव्वाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ चल रही जांच के दौरान सामने आई है। सिद्दीकी को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 27 जनवरी को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ यूजीसी की शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी और उससे जुड़े अपराधों के आरोप में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं।

पुलिस के अनुसार, 31 जनवरी को एक अदालत ने सिद्दीकी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

विश्वविद्यालय उस समय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आया, जब इसके मेडिकल इंस्टीट्यूट से जुड़े तीन डॉक्टरों के नाम 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए विस्फोट मामले में संदिग्धों के रूप में सामने आए। आरोप है कि ये संदिग्ध विस्फोट में शामिल एक आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा थे। इनमें उमर नबी भी शामिल था, जो कथित तौर पर उस कार को चला रहा था जिसमें विस्फोट हुआ।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मान्यता की अवधि 2018 में समाप्त होने के बावजूद विश्वविद्यालय ने खुद को यूजीसी-मान्यता प्राप्त बताना जारी रखा और कथित तौर पर दाखिले लुभाने के लिए यह दावा वेबसाइट और अन्य प्रचार सामग्री में दर्शाता रहा।

पुलिस ने बताया कि सिद्दीकी को पहले 27 जनवरी से चार दिन की पुलिस हिरासत में लिया गया था, ताकि मान्यता से जुड़े दावों और विश्वविद्यालय द्वारा चलाए जा रहे बीएड और इंजीनियरिंग जैसे पाठ्यक्रमों के बारे में पूछताछ की जा सके।

क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पहले की कार्रवाई के बाद हुई है। ईडी ने पिछले साल नवंबर में सिद्दीकी को विश्वविद्यालय से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में गिरफ्तार किया था।

ईडी ने इससे पहले दिल्ली की एक अदालत को बताया था कि विश्वविद्यालय ने “झूठे दावों” के जरिए छात्रों को दाखिले के लिए प्रेरित कर कथित तौर पर 45 करोड़ रुपये की आपराधिक आय अर्जित की।

जनवरी में एजेंसी ने मामले में आरोपपत्र दाखिल करते हुए विश्वविद्यालय से जुड़ी 139.97 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को कुर्क किया था।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि संस्थान के फंड को परिवार-नियंत्रित संस्थाओं के जरिए परत-दर-परत घुमाया गया और सिद्दीकी के परिवार के सदस्यों के पक्ष में विदेशी रेमिटेंस भेजी गईं। एजेंसियां वित्तीय लेन-देन के साथ-साथ शैक्षणिक और मान्यता से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं। आगे की जांच जारी है, पुलिस ने बताया।