
नई दिल्ली, 6 फरवरी (पीटीआई) भारत और अमेरिका ने यहां आयोजित एक अहम बैठक में “महत्वपूर्ण और उभरती रक्षा तकनीकों” में सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की, ताकि बदलती जरूरतों को पूरा किया जा सके, अधिकारियों ने गुरुवार को बताया।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 3 और 4 फरवरी को नई दिल्ली में 24वीं भारत-अमेरिका संयुक्त तकनीकी समूह (जेटीजी) की पूर्ण बैठक की मेजबानी की।
बैठक की सह-अध्यक्षता डीआरडीओ की महानिदेशक (उत्पादन समन्वय एवं सेवाएं संपर्क) चंद्रिका कौशिक और अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसंधान एवं इंजीनियरिंग के अवर सचिव कार्यालय में क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज़ के सहायक सचिव माइकल फ्रांसिस डॉड ने की, रक्षा मंत्रालय ने बताया।
अधिकारियों के अनुसार, यह पूर्ण बैठक अक्टूबर 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के बीच हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका प्रमुख रक्षा साझेदारी के ढांचे की दृष्टि और नीति-निर्देशों के अनुरूप आयोजित की गई।
मंत्रालय के बयान में कहा गया, “दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने रक्षा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में चल रहे सहयोग की समीक्षा की, उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की और बदलती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण व उभरती रक्षा तकनीकों में सहयोग को और मजबूत करने के प्रस्तावों पर विचार किया।”
चर्चा में विश्वविद्यालय-संबद्ध अनुसंधान केंद्रों, रक्षा प्रयोगशालाओं और उद्योगों की संयुक्त अनुसंधान एवं विकास पहलों में भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
“इसके अलावा, बैठक में इनोवेशन ब्रिज ढांचे के तहत डीआरडीओ और डिफेंस इनोवेशन यूनिट के बीच संभावित सहयोग पर भी विचार किया गया और अंत में एक परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए गए,” मंत्रालय ने कहा।
इस बैठक में अमेरिकी रक्षा विभाग और विदेश विभाग के अंतर्गत संस्थानों व प्रयोगशालाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ भारत की त्रि-सेवाओं, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के डीआरडीओ वैज्ञानिक एवं अधिकारी शामिल हुए।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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