नेहरू-गांधी विरासत पर पीएम का निशाना, लोगों को ‘समस्या’ मानने के लिए साधा हमला

**EDS: THIRD PARTY IMAGE, SCREENGRAB VIA SANSAD TV** New Delhi: Prime Minister Narendra Modi replies to the Motion of Thanks to the President's address in the Rajya Sabha during the Budget session of Parliament, in New Delhi, Thursday, Feb. 5, 2026. (Sansad TV via PTI Photo)(PTI02_05_2026_000304B)

नई दिल्ली, 6 फरवरी (पीटीआई) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लगभग 100 मिनट लंबे भाषण के दौरान नेहरू-गांधी परिवार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि वे भारत की आबादी को “समस्याओं” के रूप में देखते थे और शासन के प्रति विपक्षी पार्टी के दृष्टिकोण की कड़ी आलोचना की।

उन्होंने गांधी परिवार पर महात्मा गांधी का उपनाम “चुराने” का आरोप भी लगाया और कहा कि चोरी करना उनकी पैतृक प्रवृत्ति रही है।

राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए मोदी ने कांग्रेस पार्टी की कार्यसंस्कृति का भी मज़ाक उड़ाया और कहा कि वह केवल कल्पना करने में लगी रहती है, ज़मीन पर अमल कुछ नहीं करती।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के ईरान में दिए गए एक भाषण का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने जवाहरलाल नेहरू द्वारा देश की 35 करोड़ आबादी को “समस्या” बताए जाने का उल्लेख किया था और बाद में स्वयं 57 करोड़ की आबादी को भी वही समस्या बताया था।

उस समय देश की जनसंख्या 35 करोड़ थी, उन्होंने कहा।

मोदी ने इंदिरा गांधी के शब्द उद्धृत करते हुए कहा, “उन्होंने कहा था कि आज हमारे देश की आबादी 57 करोड़ है। इसलिए मेरे सामने समस्याओं की संख्या भी उतनी ही है। मेरे पिता 35 करोड़ की आबादी को समस्या मानते थे और अब देश की समस्या 57 करोड़ है।”

प्रधानमंत्री ने सवाल किया, “कोई अपने ही देश की आबादी को समस्या कैसे मान सकता है? यही उनकी सोच और हमारी सोच के बीच का अंतर है।”

उन्होंने कांग्रेस की कार्यसंस्कृति पर तंज कसते हुए योजना आयोग को लेकर इंदिरा गांधी की आलोचना का भी ज़िक्र किया और 2014 में स्वयं द्वारा उस संस्था को समाप्त किए जाने को रेखांकित किया।

विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए मोदी ने कहा कि नेहरू-गांधी काल में केवल “जीप” और “खच्चर” की संस्कृति पर भरोसा किया गया और योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठाया। उन्होंने उदाहरण दिया कि एक बार इंदिरा गांधी हिमाचल प्रदेश गई थीं, लेकिन योजना आयोग पहाड़ी क्षेत्रों के लिए कोई विशेष योजना बनाने को तैयार नहीं था।

इंदिरा गांधी को उद्धृत करते हुए मोदी ने कहा, “मैं हिमाचल प्रदेश गई थी। लौटकर मैंने योजना आयोग से कहा कि हमारे कार्यकर्ताओं को जीप नहीं, बल्कि सामान ढोने के लिए खच्चरों की ज़रूरत है।” लेकिन उन्हें बताया गया कि “खच्चरों के लिए कोई नीति नहीं है”, इसलिए या तो जीप मिलेगी या कुछ भी नहीं।

यह कांग्रेस के लंबे शासन की कार्यसंस्कृति थी, और इंदिरा गांधी स्वयं जानती थीं कि यह “पाप” चल रहा है, फिर भी उन्होंने इसे सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। योजना आयोग के संस्थापक उनके पिता थे, जिसकी वे आलोचना कर रही थीं।

मोदी ने कहा, “2014 तक सभी दुखी और चिंतित थे, अपनी गलतियों को देख रहे थे, लेकिन सुधार के लिए तैयार नहीं थे।” उन्होंने जोड़ा कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने योजना आयोग को समाप्त कर नीति आयोग बनाया।

क्रियान्वयन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस केवल कल्पना कर सकती है। नर्मदा बांध परियोजना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस बांध की परिकल्पना सरदार वल्लभभाई पटेल ने उनके जन्म से पहले की थी, इसकी आधारशिला जवाहरलाल नेहरू ने रखी, लेकिन इसका निर्माण उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद पूरा हुआ।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने अब सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया है, जिसे कांग्रेस सरकार ने हस्ताक्षरित किया था।

राहुल गांधी का नाम लिए बिना प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने कभी स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा नहीं दिया। “उनकी हालत यह है कि वे अपने ही घर में शुरू हुए स्टार्टअप को भी संभाल नहीं पा रहे,” उन्होंने कहा।

प्रधानमंत्री ने बैंकिंग क्षेत्र के सुधारों का भी उल्लेख किया और कहा कि बैंकों का मुनाफ़ा रिकॉर्ड स्तर पर है और एनपीए एक प्रतिशत से नीचे आ गया है। उनकी सरकार ने बैंकों को उस बीमारी से मुक्त किया जो व्यवस्था में घर कर गई थी और उनकी वित्तीय सेहत बहाल की।

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि 2014 से पहले “फोन बैंकिंग संस्कृति” प्रचलित थी, जिसमें राजनेता ऋण वितरण को प्रभावित करने के लिए फोन करते थे।

इसके परिणामस्वरूप ऋण उचित मूल्यांकन के बजाय फोन कॉल के आधार पर दिए जाते थे।

उन्होंने कहा, “गरीबों को अक्सर ऋण से वंचित रखा गया और लगभग 50 प्रतिशत आबादी के पास बैंक खाते तक नहीं थे। कांग्रेस नेताओं की सिफारिश पर लाखों रुपये ऐसे लोगों को दिए गए जिन्होंने पैसा कभी लौटाया नहीं।” मोदी ने जोड़ा कि यूपीए काल में इससे बैंकिंग प्रणाली लगभग ढहने की कगार पर पहुंच गई थी।

इसी तरह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) भी अब रिकॉर्ड मुनाफ़ा कमा रहे हैं और कुछ वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ रहे हैं।

मोदी ने आगे कहा कि कांग्रेस सरकार “रिमोट कंट्रोल” से चलती थी, जबकि उनकी सरकार भी रिमोट से चलती है—लेकिन उनका रिमोट देश के 140 करोड़ नागरिक हैं। पीटीआई केआरएच एचवीए

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