
टोक्यो, 8 फरवरी (एपी) — जापान में रविवार को संसदीय चुनावों के लिए मतदान शुरू हुआ। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची को उम्मीद है कि उनकी संघर्षरत पार्टी को इतनी बड़ी जीत मिलेगी कि वह अपने महत्वाकांक्षी रूढ़िवादी राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा सकें।
ताकाइची बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन पिछले सात दशकों में अधिकांश समय सत्ता में रही सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) को फंडिंग और धार्मिक घोटालों से नुकसान पहुंचा है। इन्हीं हालात को पलटने के लिए उन्होंने अचानक चुनाव बुलाए।
उनका लक्ष्य जापान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना है, खासकर ऐसे समय में जब चीन के साथ तनाव बढ़ रहा है। वह जापान के अहम अमेरिकी सहयोगी के साथ रिश्तों को भी मजबूत करना चाहती हैं, जिनके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वह कभी-कभी अप्रत्याशित मानती हैं।
अक्टूबर में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने वाली अल्ट्रा-रूढ़िवादी ताकाइची ने “काम, काम और काम” करने का वादा किया है। उनका चंचल लेकिन सख्त नेतृत्व अंदाज़ युवा मतदाताओं को खासा पसंद आ रहा है।
ताजा सर्वेक्षणों के अनुसार एलडीपी को निचले सदन में भारी जीत मिल सकती है। विपक्ष, नया मध्यमार्गी गठबंधन बनने और दक्षिणपंथी दलों के उभरने के बावजूद, बेहद बिखरा हुआ माना जा रहा है।
ताकाइची को भरोसा है कि उनकी एलडीपी और उसकी नई सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी (जेआईपी) मिलकर 465 सदस्यीय निचले सदन में बहुमत हासिल कर लेंगी।
यदि एलडीपी बहुमत हासिल नहीं कर पाई तो “मैं इस्तीफा दे दूंगी,” ताकाइची ने कहा।
उनकी गठबंधन सरकार की बड़ी जीत से जापान की सुरक्षा, आव्रजन और अन्य नीतियों में दाईं ओर बड़ा झुकाव आ सकता है। जेआईपी नेता हिरोफुमी योशिमुरा ने कहा कि उनकी पार्टी “त्वरक” की भूमिका निभाएगी।
ताकाइची ने दिसंबर तक रक्षा नीतियों में संशोधन कर आक्रामक सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने, हथियार निर्यात पर प्रतिबंध हटाने और युद्धोत्तर शांतिवादी सिद्धांतों से और दूर जाने का संकल्प लिया है।
उन्होंने विदेशियों, जासूसी विरोधी कानूनों और अन्य सख्त उपायों पर जोर दिया है, जिनके बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि वे नागरिक अधिकारों को कमजोर कर सकते हैं।
