भारत को पैक्स सिलिका में शामिल होने का निमंत्रण देने को लेकर बेहद उत्साहित हैं: शीर्ष अमेरिकी अधिकारी

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image received on Feb. 8, 2026, Prime Minister Narendra Modi delivers press statements alongside Malaysian Prime Minister Anwar Ibrahim, unseen, following delegation-level talks, in Kuala Lumpur, Malaysia. (PMO via PTI Photo)(PTI02_08_2026_000046B)

न्यूयॉर्क, 8 फरवरी (पीटीआई) अमेरिका ने कहा है कि वह आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा से जुड़ी ‘पैक्स सिलिका’ पहल में भारत को शामिल होने का निमंत्रण देने को लेकर “बेहद उत्साहित” है और जल्द ही भारत सरकार के साथ इस संबंध में समझौते पर हस्ताक्षर करेगा। इससे नई दिल्ली के साथ संबंधों में “बहुत सकारात्मक गति” को रेखांकित किया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच “बेहतरीन संबंधों” को उजागर करते हुए वाशिंगटन ने यह भी कहा कि भारत शायद दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो मानव प्रतिभा की विशालता के मामले में “चीन को टक्कर” दे सकता है।

आर्थिक मामलों के लिए अमेरिका के अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब हेलबर्ग ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, “हम भारत को पैक्स सिलिका में शामिल होने का निमंत्रण देने को लेकर बेहद उत्साहित हैं और मैं कुछ ही हफ्तों में भारत यात्रा पर जा रहा हूं, जहां भारतीय सरकार के साथ एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर होंगे।”

अमेरिका ने पिछले वर्ष दिसंबर में ‘पैक्स सिलिका’ की शुरुआत की थी। यह एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा इनपुट से लेकर उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, एआई अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स तक एक सुरक्षित, समृद्ध और नवाचार-प्रेरित सिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है। इसके मौजूदा हस्ताक्षरकर्ता देशों में ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इज़राइल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। प्रारंभिक समूह में भारत शामिल नहीं था।

हेलबर्ग ने कहा कि दिसंबर में पहल शुरू होने के बाद जनवरी तक भारत के इसमें शामिल होने को लेकर “विचारों का मेल” हो चुका था। उन्होंने वाशिंगटन फॉरेन प्रेस सेंटर द्वारा आयोजित एक ब्रीफिंग में कहा, “हम भारत के साथ साझेदारी की दिशा में चीज़ों के बहुत तेज़ी से और सकारात्मक रूप से आगे बढ़ने से बेहद प्रसन्न हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत में बड़े पैमाने पर खनन और प्रसंस्करण गतिविधियां मौजूद हैं, जो आपूर्ति श्रृंखला पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता रखती हैं। “ऐसे कई क्षेत्र हैं, जिनमें हम भारत के साथ साझेदारी कर सकते हैं,” उन्होंने कहा।

हेलबर्ग ने यह भी कहा कि चीन के अलावा, “भारत शायद दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जो युवा और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित मानव प्रतिभा की व्यापकता और गहराई के मामले में चीन को टक्कर दे सकता है।” उन्होंने जोड़ा, “हम भारत को बहुत सकारात्मक दृष्टि से देखते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बेहतरीन संबंध है।”

उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर भी उत्साह जताया। उनका यह बयान ऐसे समय आया, जब दोनों देशों ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर बताया कि पारस्परिक और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार के लिए एक अंतरिम समझौते के ढांचे पर सहमति बन गई है।

समझौते के तहत भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कई अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों—जैसे ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स—पर शुल्क समाप्त या कम करेगा। संयुक्त वक्तव्य के अनुसार, अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क हटाने के लिए एक कार्यकारी आदेश भी जारी किया।

हेलबर्ग ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों ही बहुत बड़े देश हैं—अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि भारत जनसंख्या के लिहाज से सबसे बड़ा और युवा देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “इतने बड़े देशों के बीच तालमेल बनाने में थोड़ा अधिक प्रयास लगता है।”

ब्रीफिंग के दौरान हेलबर्ग ने 4 फरवरी को वाशिंगटन में आयोजित पहले ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ का भी जिक्र किया, जिसकी मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने की थी। इस बैठक में 55 देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने वैश्विक महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता और सुरक्षा पर चर्चा की। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसमें हिस्सा लिया और आपूर्ति श्रृंखलाओं में अत्यधिक एकाग्रता की चुनौतियों तथा संरचित अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से जोखिम कम करने के महत्व पर जोर दिया।