सूर्यकुमार यादव में वही संयम है जो करियर के अंतिम दौर में एमएस धोनी में था: हरमीत सिंह

Mumbai: India's captain Suryakumar Yadav with teammates celebrates after winning the ICC Men's T20 World Cup 2026 cricket match against USA, at the Wankhede Stadium, in Mumbai, Saturday, Feb. 7, 2026. (PTI Photo/Kunal Patil)(PTI02_07_2026_000851B)

मुंबई, 8 फरवरी (पीटीआई)

दबाव की परिस्थितियों में भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव जिस शांत आत्मविश्वास का प्रदर्शन करते हैं, वह अमेरिका के स्पिनर हरमीत सिंह को दिग्गज एमएस धोनी की याद दिलाता है, जो अपने करियर के अंतिम चरण में इसी तरह के संयम के लिए जाने जाते थे।

शनिवार को यहां भारत और अमेरिका के बीच खेले गए टी20 विश्व कप के उद्घाटन मुकाबले में सूर्यकुमार यादव ने अपने अनुभव का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकाला। उनकी 49 गेंदों पर नाबाद 84 रनों की पारी दोनों टीमों के बीच अंतर साबित हुई।

मैच के बाद पत्रकारों से बातचीत में जब हरमीत से पूछा गया कि क्या उन्होंने और सूर्यकुमार ने कभी भारतीय कप्तान के करियर को इस तरह आगे बढ़ते हुए कल्पना की थी, तो उन्होंने कहा,

“बिल्कुल, हम ऐसा सोचते जरूर थे, लेकिन उन्हें सफलता थोड़ी देर से मिली। वह हमेशा से ही… मुझे लगता है कि अब उनमें वही संयम आ गया है जो एमएस धोनी में उनके करियर के अंतिम दौर में था।”

उन्होंने आगे कहा,

“एक स्ट्रोक-प्लेयर के तौर पर उनमें जो स्वाभाविक आक्रामकता है, उसके बावजूद उन्होंने एक समझदारी भरी पारी खेली, मैच को समाप्त किया और एक शानदार इनिंग खेली।”

हरमीत ने विराट कोहली का उदाहरण देते हुए कहा,

“विराट जैसे खिलाड़ियों में जो परिपक्वता होती है, वैसी ही परिपक्व पारी उन्होंने खेली। अनुभव के साथ ऐसा ही होता है और जिस जिम्मेदारी की भूमिका उन्हें दी गई है, उसमें वह शानदार काम कर रहे हैं।”

व्यक्तिगत रूप से हरमीत सिंह के लिए यह मुकाबला भावनात्मक रहा। उन्होंने भारत के खिलाफ खेलते हुए हार्दिक पांड्या और अक्षर पटेल के विकेट चटकाए और 4 ओवर में 26 रन देकर 2 विकेट के प्रभावशाली आंकड़े दर्ज किए।

उन्होंने कहा,

“सबसे पहले तो यह बहुत भावनात्मक था, लेकिन यह सिर्फ मेरी कहानी नहीं है। यह पूरी टीम की कहानी है। हर खिलाड़ी अलग-अलग जगहों, पृष्ठभूमियों और संस्कृतियों से आया है और सभी ने उतार-चढ़ाव देखे हैं।”

उन्होंने आगे कहा,

“आखिरकार क्रिकेट हमें एकजुट करता है। यह अच्छी बात रही कि टूर्नामेंट की घोषणा कुछ महीने पहले हो गई थी, जिससे मैं अपनी भावनाओं को संभाल सका।”

33 वर्षीय हरमीत का मानना है कि अमेरिका की टीम ने कुछ मौके गंवाए, जिसका फायदा भारत को मिला।

“अगर हमने कुछ बार मिसफील्डिंग न की होती तो भारत की पारी लगभग 120 रनों पर सिमट सकती थी। इससे टीम को मदद मिलती और और मौके बनते। कुल मिलाकर मैं अपने प्रदर्शन से खुश हूं, लेकिन इस बात का अफसोस है कि हम मैच खत्म नहीं कर पाए।”

उन्होंने खासतौर पर शैडली वान शाल्कविक को शॉर्ट और स्लोअर गेंदें डालने के लिए प्रोत्साहित करने में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

हरमीत ने कहा,

“गेंदबाजी में मैं काफी जिम्मेदारी लेता हूं और मेरे पास अनुभव भी है। बड़े दर्शक वर्ग के सामने ऐसे हालात में कोई भी खिलाड़ी दबाव में आ सकता है या खुद को अकेला महसूस कर सकता है।”

उन्होंने आगे कहा,

“लेकिन जब कोई साथी आकर कहता है कि ‘यह सही गेंद थी’, तो इससे काफी मदद मिलती है और मैं वही करने की कोशिश कर रहा था।”

अंत में उन्होंने कहा,

“क्रिकेट है, किसी के साथ भी कुछ भी हो सकता है। आज अभिषेक शर्मा शून्य पर आउट हो गए। लेकिन बल्लेबाजों को उतनी शर्मिंदगी नहीं झेलनी पड़ती, जितनी गेंदबाजों को झेलनी पड़ती है।”

(पीटीआई)