पिछले साल किए गए वादे भूलने वाली वित्त मंत्री द्वारा तैयार किया गया एक भुला देने वाला बजट: चिदंबरम

New Delhi: Congress MP P. Chidambaram during the Budget session of Parliament, in New Delhi, Monday, Feb. 9, 2026. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI02_09_2026_000323B)

नई दिल्ली, 9 फरवरी (पीटीआई)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने सोमवार को सरकार पर उस समय 2025-26 के लिए पूंजीगत व्यय में कटौती करने का आरोप लगाया, जब ‘न तो सार्वजनिक क्षेत्र, न निजी क्षेत्र और न ही विदेशी निवेशक भारत में निवेश कर रहे हैं’। उन्होंने केंद्रीय बजट 2026-27 को “एक भुला देने वाला बजट” करार दिया।

राज्यसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पर सामान्य चर्चा की शुरुआत करते हुए पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार की बहुचर्चित ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ अटकी हुई है, अगर पटरी से उतरी नहीं है तो। उन्होंने कहा कि युवाओं में बेरोजगारी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है और सरकार की “इंटर्नशिप योजना” विफल हो गई है।

चिदंबरम ने कृषि और ग्रामीण विकास के लिए आवंटन में कटौती को लेकर भी सरकार पर हमला किया और आरोप लगाया कि इससे गांवों को सड़कों और आवास से वंचित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “यह एक भुला देने वाला बजट है, जो ऐसी वित्त मंत्री द्वारा तैयार किया गया है, जो इस सदन में पिछले साल किए गए अपने वादे भूल गईं।”

सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “लगभग 12 वर्षों से पूंजी निवेश और सकल स्थायी पूंजी निर्माण जीडीपी के 30 प्रतिशत पर अटका हुआ है। 2024-25 में शुद्ध एफडीआई घटकर 0.09 प्रतिशत से भी कम रह गया। एफपीआई यानी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक पैसा निकाल रहे हैं। निजी निवेश, जबकि कंपनियां नकदी से भरपूर हैं, फिर भी जीडीपी के 22 प्रतिशत पर अटका हुआ है।”

उन्होंने आगे कहा, “ऐसी स्थिति में, जब न तो सार्वजनिक क्षेत्र, न निजी क्षेत्र और न ही विदेशी निवेशक भारत में निवेश कर रहे हैं, इस सरकार ने पूंजीगत व्यय में कटौती कर दी है। वर्ष 2025-26 में पूंजीगत व्यय में 1,44,376 करोड़ रुपये की भारी कटौती की गई है।”

उन्होंने कहा कि केंद्र ने अपने पूंजीगत व्यय में 25,335 करोड़ रुपये की कटौती की है और “इससे भी बदतर यह है कि राज्यों के पूंजीगत व्यय, जिसके लिए केंद्र अग्रिम देता है, उसमें 1,19,041 करोड़ रुपये की कटौती की गई है।”

बेरोजगारी की चुनौती पर जोर देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, “युवाओं में बेरोजगारी 15 प्रतिशत है। कार्यबल का 25 प्रतिशत से भी कम नियमित रोजगार में है। स्वरोजगार की ओर झुकाव बढ़ा है और चार-पांच साल पहले की तुलना में अधिक लोग कृषि क्षेत्र में काम कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “144 करोड़ की आबादी वाले देश में केवल 195 लाख, यानी दो करोड़ से भी कम लोग कारखानों में काम कर रहे हैं। विनिर्माण, जो मुख्यतः कारखानों पर आधारित है, कई वर्षों से 16 प्रतिशत पर अटका हुआ है।”

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का जिक्र करते हुए, जिसमें कॉरपोरेट घरानों को इंटर्नशिप देने के लिए राजी किया गया था, चिदंबरम ने कहा, “1,65,000 प्रस्ताव आए, लेकिन केवल 33,000 स्वीकार किए गए। क्या बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप स्वीकार करने के लिए कोई युवा नहीं है? …और जिन 33,000 ने स्वीकार किया, उनमें से 6,000 ने नौकरी छोड़ दी।”

उन्होंने पूछा, “इंटर्नशिप योजना में क्या गलत है?” और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से स्पष्टीकरण की मांग की कि यह योजना इस साल “पूरी तरह से विफल” क्यों रही।

“धीमी विकास दर” की चुनौती की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि बजट भाषण में सीतारमण द्वारा उल्लिखित ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’, जो “अपनी यात्रा पर है और हमारे कर्तव्य को पूरा करने में मदद करेगी”, वह अटकी हुई है और अभी तक गति नहीं पकड़ पाई है।

उन्होंने कहा कि 2023-24 में नाममात्र वृद्धि दर 12 प्रतिशत थी। 2024-25 में यह घटकर 9.8 प्रतिशत हो गई।

“2025-26 में, जो वर्ष एक महीने में समाप्त होगा, यह घटकर 8 प्रतिशत रह गई है। रिफॉर्म एक्सप्रेस की गति कहां है?” चिदंबरम ने पूछा।

सरकार के राजकोषीय समेकन कदमों पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, “इस गति से राजकोषीय समेकन हुआ तो एफआरबीएम (राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन) लक्ष्य हासिल करने में 12 साल लग जाएंगे।”

उन्होंने कहा कि एफआरबीएम लक्ष्य केवल एक साल—2007-08—में हासिल हुआ था और इसके बाद राजकोषीय घाटा बढ़ता गया है।

चिदंबरम ने आरोप लगाया कि सरकार ने “कुल व्यय में 1 लाख करोड़ रुपये की कटौती कर और आरबीआई से 3 लाख करोड़ रुपये का लाभांश लेकर” अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा किया।

उन्होंने कहा, “अगर पूंजीगत व्यय में ये कठोर कटौतियां न की जातीं और आरबीआई से यह अप्रत्याशित लाभ न मिलता, तो राजकोषीय घाटा 4.54 प्रतिशत नहीं बल्कि 5.5 प्रतिशत होता।”

कृषि और ग्रामीण विकास में कटौती पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कुल 60,000 करोड़ रुपये के व्यय में कटौती की गई है।

उन्होंने कहा, “कृषि में 6,985 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। ग्रामीण विकास में 53,067 करोड़ रुपये की कटौती की गई है।”

उन्होंने पूछा कि जब गांव ‘ग्राम सड़कों’ के लिए रो रहे हैं तो क्या ग्रामीण क्षेत्रों को विकास की जरूरत नहीं है?

चिदंबरम ने राज्यों को दिए जाने वाले अनुदान और सहायता में 30,391 करोड़ रुपये की कटौती पर भी सरकार की आलोचना की। साथ ही उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत हर घर को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित 67,000 करोड़ रुपये में से “केवल 17,000 करोड़ रुपये” खर्च किए जाने पर सवाल उठाए।

उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा व्यय जीडीपी के 1.6 प्रतिशत पर आ गया है, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इसके अलावा उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना के लिए आवंटन को 22,919 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये किए जाने पर कटाक्ष किया, जिसमें “सिर्फ 1,500 करोड़ रुपये” का प्रावधान है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित तीन केमिकल पार्कों और कंटेनर निर्माण के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना के लिए कोई आवंटन घोषित नहीं किया गया है।