रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से मतभेद सुलझाएं: मिसरी–मा झाओशू वार्ता पर चीन

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image posted on Feb. 10, 2026, Foreign Secretary Vikram Misri with British High Commissioner to India Lindy Cameron CB OBE and others during a meeting, in New Delhi. (@MEAIndia/X via PTI Photo)(PTI02_10_2026_000510B)

बीजिंग, 11 फरवरी (पीटीआई)। भारत और चीन को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए, मतभेदों का उचित प्रबंधन करते हुए सहयोग का विस्तार करना चाहिए। चीन के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को नई दिल्ली में हुई भारत-चीन रणनीतिक वार्ता पर यह बयान दिया।

विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन के कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा झाओशू के बीच भारत-चीन रणनीतिक संवाद हुआ, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। मा झाओशू ब्रिक्स शेरपा बैठक में भाग लेने के लिए भारत दौरे पर हैं।

चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्थिति, अपनी-अपनी आंतरिक और बाह्य नीतियों, साझा हितों से जुड़े मुद्दों और चीन-भारत संबंधों पर मित्रतापूर्ण, स्पष्ट और गहन संवाद किया।

विज्ञप्ति में कहा गया कि जटिल और तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए चीन और भारत को राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमतियों को ईमानदारी से लागू करना चाहिए और संबंधों को रणनीतिक व दीर्घकालिक नजरिये से संभालना चाहिए।

दोनों देशों को इस रणनीतिक समझ को बनाए रखना चाहिए कि वे प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयोगी साझेदार हैं, और एक-दूसरे के विकास के अवसर हैं, न कि खतरा।

चीन ने कहा कि दोनों देशों को आपसी विश्वास गहरा करना, सहयोग बढ़ाना, मतभेदों का उचित प्रबंधन करना और संबंधों को स्वस्थ व स्थिर दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए।

दोनों पक्षों ने 2026 और 2027 में ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान एक-दूसरे के कार्यों का समर्थन करने पर सहमति जताई।

उन्होंने बहुपक्षवाद और संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करने, ग्लोबल साउथ के देशों के बीच एकता और सहयोग मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय न्याय और निष्पक्षता की रक्षा करने तथा बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिए मिलकर काम करने की भी सहमति व्यक्त की।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपने बयान में कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

मिसरी और मा की वार्ता में मुख्य रूप से पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद तनावग्रस्त हुए संबंधों को स्थिर और पुनर्निर्मित करने के लिए उठाए गए कदमों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

रणनीतिक संवाद के तहत हुई बैठक में दोनों पक्षों ने अद्यतन हवाई सेवा समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने की आवश्यकता को स्वीकार किया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में आई “सकारात्मक गति” की समीक्षा की और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने तथा “संवेदनशील मुद्दों पर चिंताओं का समाधान” करने के उपायों पर चर्चा की।

हालांकि उन्होंने इन “संवेदनशील मुद्दों” का विवरण नहीं दिया, लेकिन माना जा रहा है कि भारत ने दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ) के निर्यात पर चीन के नियंत्रण उपायों को लेकर चिंता जताई है।

भारतीय बयान में कहा गया कि चर्चाएं मुख्य रूप से द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और पुनर्निर्मित करने में हुई हालिया प्रगति तथा आगे बढ़ाने के उपायों पर केंद्रित थीं।

“दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों की समग्र प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने अपने नेताओं के मार्गदर्शन को लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता भी शामिल है।

MEA ने कहा कि मिसरी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के सफल पुनःआरंभ का स्वागत किया और इसके दायरे को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई।

“दोनों पक्षों ने अद्यतन हवाई सेवा समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने की आवश्यकता को स्वीकार किया। साथ ही, वीजा सुविधा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए व्यावहारिक कदम जारी रखने पर सहमति जताई,” बयान में कहा गया।

मिसरी और मा ने विभिन्न क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की।

पिछले कुछ महीनों में भारत और चीन ने अक्टूबर 2024 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य गतिरोध समाप्त होने के बाद संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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