तलाक और पुनर्विवाह के बाद मुकदमा जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग: उत्तराखंड हाईकोर्ट

नैनीताल, 11 फरवरी (PTI) — उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तलाक और पुनर्विवाह के बाद वैवाहिक विवाद से जुड़े आपराधिक मामले की कार्यवाही को निरस्त कर दिया।

न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकल पीठ ने देहरादून के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित सभी कार्यवाहियों, जिसमें आरोपपत्र और आवेदक के खिलाफ जारी समन आदेश भी शामिल था, को रद्द कर दिया।

मामले के अनुसार, आवेदक और प्रतिवादी की शादी वर्ष 2009 में हुई थी। स्वभाव में अंतर और वैवाहिक विवाद के कारण दोनों अलग रहने लगे। वर्ष 2016 में प्रतिवादी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए और 323 तथा दहेज निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत आवेदक के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी।

पति ने आरोपों को झूठा और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया। मामले की सुनवाई के दौरान पति ने तलाक की याचिका दायर की, जिसे अदालत ने 2018 में स्वीकार कर लिया। तलाक के बाद पत्नी ने पुनर्विवाह कर लिया।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने पाया कि मामला वैवाहिक विवाद से उत्पन्न हुआ था। हालांकि, अदालत ने कहा कि जब विवाह समाप्त हो चुका है, तो ऐसी परिस्थितियों में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना व्यक्ति को अनावश्यक उत्पीड़न का कारण बनेगा और यह न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया। PTI COR DPT MNK MNK

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