
नई दिल्ली, 12 फरवरी (पीटीआई) दिल्ली सरकार शहर में विभिन्न नागरिक-केंद्रित सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी को सुव्यवस्थित करने के लिए लोगों का एकीकृत डेटा हब विकसित करने हेतु हरियाणा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के मॉडलों का अध्ययन कर रही है, अधिकारियों ने बुधवार को बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार का सूचना एवं प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग ई-गवर्नेंस पहलों के क्रियान्वयन में सहायता के लिए केंद्रीय भंडार के रूप में डेटा हब विकसित करने पर काम कर रहा है।
हाल ही में विभाग की टीमें ई-गवर्नेंस क्षेत्र की प्रमुख पहलों का अध्ययन करने के लिए हरियाणा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश का दौरा कर चुकी हैं।
उदाहरण के लिए, राजस्थान सरकार डिजिटल शासन के लिए डेटा-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रही है, जिसमें विभिन्न नागरिक-केंद्रित सेवाओं के एकीकरण पर जोर दिया जा रहा है।
दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सिटिजन डेटा हब मॉडल की एक प्रमुख विशेषता यह है कि डेटा गोपनीयता के मुद्दों के कारण इसके लिए वैधानिक प्रावधानों की आवश्यकता होती है। इसलिए सरकार को इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कोई विधायी साधन या अन्य वैधानिक व्यवस्था करनी होगी।”
उन्होंने कहा कि इस दृष्टि से आईटी विभाग एकीकृत डेटा हब से जुड़े कानूनी पहलुओं को पूरा करने के लिए एक सलाहकार नियुक्त करने पर विचार कर रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, यह एकीकृत डेटा हब केंद्रीय भंडार के रूप में कार्य करेगा, जिससे राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और विभिन्न सामाजिक कल्याण पेंशन जैसी सरकारी सेवाओं या योजनाओं के लिए बार-बार दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि डेटा हब नागरिकों के डेटा का एकमात्र प्रामाणिक स्रोत बन सकता है, जिससे सरकारी योजनाओं के अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें हटाया जा सकेगा।
अधिकारियों ने बताया कि आईटी विभाग विभिन्न विभागों से प्राप्त समेकित आंकड़ों के आधार पर कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के डेटा पर काम कर रहा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि डेटा हब से एक ही लाभार्थी को कई बार सब्सिडी या मुफ्त सेवाएं मिलने जैसी पुनरावृत्ति को रोका जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि नागरिकों को विभिन्न सेवाओं के लिए आवेदन करने में भी कम परेशानी होगी क्योंकि उन्हें बार-बार दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पड़ेंगे।
अधिकारियों के अनुसार, डेटा हब में लोगों के व्यक्तिगत विवरण जैसे नाम, परिवार के सदस्यों की संख्या, पेशा, वार्षिक आय, पता, जाति, आयु, शैक्षिक योग्यता और लिंग आदि शामिल किए जाएंगे।
यह दिल्ली सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवेदकों की पात्रता निर्धारित करने में मदद करेगा।
एक अधिकारी ने कहा, “नागरिकों के व्यक्तिगत और पारिवारिक डेटा को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, राजस्व, दिल्ली जल बोर्ड, बिजली, व्यापार एवं कर तथा एमसीडी जैसे सभी विभागों से एकत्र किया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि इस प्रकार एकीकृत हब पर समेकित व्यापक डेटा विभिन्न योजनाओं के तहत आवेदकों के सत्यापन और क्रॉस-रेफरेंस के लिए एकल मंच तैयार करेगा।
