ट्रंप प्रशासन के पीछे हटने के बीच नाटो में अमेरिका के सहयोगी यूरोप पर केंद्रित

Defense Secretary Pete Hegseth arrives before the lighting of the National Christmas Tree on the Ellipse, Thursday, Dec. 4, 2025, near the White House in Washington. (AP Photo/Julia Demaree Nikhinson)

ब्रसेल्स, 12 फरवरी (एपी) नाटो में यूरोपीय सहयोगियों ने गुरुवार को इस चिंता को खारिज कर दिया कि संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े सुरक्षा संगठन में अपनी नेतृत्व भूमिका से पीछे हट गया है, जिससे यूरोप और कनाडा पर उसकी रक्षा का बड़ा बोझ आ गया है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ब्रसेल्स स्थित नाटो मुख्यालय में रक्षा मंत्रियों की बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे पहले विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी दिसंबर में नाटो विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल नहीं हुए थे।

किसी अमेरिकी प्रशासन के सदस्यों का नाटो की शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था ‘नॉर्थ अटलांटिक काउंसिल’ की मंत्रिस्तरीय बैठक से अनुपस्थित रहना दुर्लभ है, वह भी लगातार दो बैठकों में। हेगसेथ की जगह रक्षा उप सचिव एल्ब्रिज कोल्बी को भेजा गया।

आइसलैंड की विदेश मंत्री थॉर्गेरदुर कात्रिन गुन्नार्सदोतिर ने कहा, “दुर्भाग्य से वह एक अच्छे आयोजन से चूक रहे हैं। निश्चित रूप से मंत्रियों का यहां होना बेहतर होता है, लेकिन मैं इसे खराब संकेत नहीं कहूंगी।”

जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा, “मैं निराश नहीं हूं। हम सभी के पास व्यस्त कार्यक्रम हैं। कभी अमेरिकी रक्षा मंत्री यहां होते हैं, कभी नहीं—यह उनका निर्णय और उनकी जिम्मेदारियां हैं।”

समय के साथ बदलाव

1949 में नाटो की स्थापना के समय इसके पहले महासचिव लॉर्ड हेस्टिंग्स इस्मे से जब पूछा गया कि संगठन का उद्देश्य क्या है, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा था: “अमेरिकियों को अंदर रखना, रूसियों को बाहर और जर्मनों को नीचे।”

आज हालात बदल चुके हैं—जर्मनी आगे बढ़ रहा है। रूस द्वारा चार साल पहले यूक्रेन पर आक्रमण के बाद जर्मनी ने अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए 100 अरब यूरो (118 अरब डॉलर) खर्च करने का संकल्प लिया।

नाटो महासचिव मार्क रुटे की बड़ी जिम्मेदारी अमेरिका को संगठन में सक्रिय बनाए रखना है।

उन्होंने बैठक की अध्यक्षता से पहले कहा, “उन्हें पूरी दुनिया का ध्यान रखना है। यही अमेरिका है। मैं इसे पूरी तरह स्वीकार करता हूं और सहमत हूं।”

रुटे ने कहा कि अमेरिका लगातार यूरोप और कनाडा से अधिक रक्षा खर्च और नाटो क्षेत्र की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने की मांग करता रहा है, जबकि अमेरिका नाटो की परमाणु निरोधक क्षमता की गारंटी देता है।

फिर भी संदेह बने हुए हैं। सहयोगियों को आशंका है कि यूरोप से और अमेरिकी सैनिक हटाए जा सकते हैं।

नीदरलैंड के रक्षा मंत्री रूबेन ब्रेकेलमंस ने कहा, “मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है ‘नो-सप्राइज’ नीति, जिस पर नाटो महासचिव और अमेरिका के बीच सहमति बनी है।”

पीछे हटने के संकेत

कम से कम सार्वजनिक तौर पर ट्रंप प्रशासन नाटो में कम सक्रिय दिख रहा है। एक वर्ष पहले हेगसेथ ने कहा था कि अमेरिका की सुरक्षा प्राथमिकताएं कहीं और हैं और यूरोप को खुद तथा यूक्रेन को रूस के खिलाफ युद्ध में अधिक जिम्मेदारी लेनी होगी।

पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में यूक्रेन को भेजी गई अमेरिकी हथियार और वित्तीय सहायता अब कम हो गई है। यूरोपीय सहयोगियों और कनाडा को अब अमेरिका से हथियार खरीदकर यूक्रेन को देने पड़ रहे हैं।

यूक्रेन को अतिरिक्त सैन्य समर्थन जुटाने के लिए पश्चिमी देशों की बैठक भी गुरुवार को नाटो में हुई। ‘यूक्रेन डिफेंस कॉन्टैक्ट ग्रुप’, जिसकी अगुवाई पहले पेंटागन करता था, अब ब्रिटेन और जर्मनी के नेतृत्व में है।

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने घोषणा की कि उनका देश यूक्रेन को “अतिरिक्त 50 करोड़ पाउंड (682 मिलियन डॉलर) की त्वरित वायु रक्षा सहायता” देगा।

स्वीडन ने भी अधिक अमेरिकी हथियार खरीदने की मंशा जताई है। नीदरलैंड यूक्रेनी पायलटों को एफ-16 लड़ाकू विमानों का प्रशिक्षण देने के लिए अतिरिक्त फ्लाइट सिमुलेटर भेजेगा।

‘आर्कटिक सेंट्री’ की घोषणा

बैठक का एक प्रमुख परिणाम ‘आर्कटिक सेंट्री’ पहल की घोषणा रही, जो उत्तरी क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा चिंताओं के जवाब और ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जे की कोशिशों को हतोत्साहित करने का प्रयास माना जा रहा है।

यह पहल कथित तौर पर आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए है, लेकिन इसे मुख्य रूप से मौजूदा राष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों को नाटो के तहत समन्वित करने की पहल बताया गया है।

डेनमार्क, फ्रांस और जर्मनी इसमें भाग लेंगे, जबकि फिनलैंड और स्वीडन के शामिल होने की संभावना है। बेल्जियम अपनी भूमिका पर विचार कर रहा है।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका इसमें क्या भूमिका निभाएगा।

नाटो में अमेरिकी राजदूत मैथ्यू व्हिटेकर ने कहा, “यह केवल अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। हमें सक्षम और मजबूत सहयोगियों की जरूरत है, जो हमारी सामूहिक सुरक्षा में योगदान दें।”

पिछले महीने ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड—जो नाटो सदस्य डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है—को अपने में मिलाने की धमकियों ने गठबंधन को झकझोर दिया था। नाटो का मुख्य उद्देश्य अपने 32 सदस्य देशों की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना है, न कि उसे कमजोर करना।

यूरोपीय सहयोगियों और कनाडा को उम्मीद है कि ‘आर्कटिक सेंट्री’ और अमेरिका, डेनमार्क तथा ग्रीनलैंड के बीच जारी वार्ताएं इस विवाद को शांत कर देंगी और नाटो को अपनी प्राथमिकता—यूक्रेन में रूस के युद्ध—पर ध्यान केंद्रित करने देंगी।

बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रांकेन ने कहा, “कम से कम इससे अटलांटिक के पार होने वाली अनावश्यक तनातनी खत्म होगी। ग्रीनलैंड प्रकरण नाटो के 76 वर्षों के इतिहास का सबसे अच्छा क्षण नहीं था। यह एक अनावश्यक संकट था।” (एपी) RD RD