
नई दिल्ली, 13 फरवरी (पीटीआई) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थित होंगे।
मोदी ने नए परिसर में ‘सेवा तीर्थ’ की पट्टिका का अनावरण किया — यह नाम परिसर की दीवार पर देवनागरी लिपि में अंकित है। इसके नीचे ‘नागरिक देवो भव’ (नागरिक ईश्वर के समान है) का आदर्श वाक्य लिखा है।
पीएमओ अब रायसीना हिल स्थित साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ में स्थानांतरित होगा, जिससे कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के वे कार्यालय एक साथ आ जाएंगे, जो पहले अलग-अलग स्थानों पर थे।
इस अवसर पर आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल, पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और पीएमओ के अधिकारी उपस्थित थे।
अधिकारियों ने बताया कि 2014 से मोदी सरकार भारत के औपनिवेशिक अतीत के प्रतीकों से दूर जाने और मानसिकता में बदलाव लाने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय को अब सेवा तीर्थ कहा जाएगा, केंद्रीय सचिवालय भवनों का नाम कर्तव्य भवन रखा गया है और राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया गया है।
इसी भावना के तहत, प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास वाली रेस कोर्स रोड का नाम लोक कल्याण मार्ग रखा गया है और राज भवन तथा राज निवास का नाम क्रमशः लोक भवन और लोक निवास कर दिया गया है।
पीएमओ की ओर से गुरुवार को जारी बयान में कहा गया, “यह उद्घाटन भारत की प्रशासनिक शासन संरचना में एक परिवर्तनकारी मील का पत्थर है और यह आधुनिक, कुशल, सुलभ तथा नागरिक-केंद्रित शासन तंत्र के निर्माण के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
दशकों से, कई प्रमुख सरकारी कार्यालय और मंत्रालय सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर बिखरे और पुराने ढांचे में कार्यरत थे।
इस बिखराव के कारण कार्यात्मक अक्षमताएं, समन्वय में चुनौतियां, रखरखाव लागत में वृद्धि और अनुपयुक्त कार्य वातावरण जैसी समस्याएं उत्पन्न होती थीं। नए भवन परिसर इन समस्याओं का समाधान करते हुए प्रशासनिक कार्यों को आधुनिक और भविष्य के अनुरूप सुविधाओं में एकीकृत करते हैं।
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