भारत की अंतरिक्ष योजनाएं प्राचीन वैज्ञानिक विरासत की आधुनिक अभिव्यक्ति: राजनाथ सिंह

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image posted on Feb. 15, 2026, Defence Minister Rajnath Singh meets spiritual leader Sadhguru during Maha Shivratri celebrations at Isha Yoga Center, in Coimbatore, Tamil Nadu. (@rajnathsingh/X via PTI Photo)(PTI02_15_2026_000986B)

कोयंबटूर (तमिलनाडु), 16 फरवरी (पीटीआई) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत के अंतरिक्ष मिशन जैसे चंद्रयान और आदित्य-एल1 केवल तकनीकी उपलब्धियां नहीं हैं, बल्कि वे इस बात की आधुनिक अभिव्यक्ति हैं कि प्राचीन वैज्ञानिक भावना हमेशा हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही है।

यहां सद्गुरु के नेतृत्व वाले ईशा योग केंद्र में आयोजित महाशिवरात्रि समारोह के उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि सूर्य और चंद्रमा केवल खगोलीय पिंड नहीं हैं, बल्कि वे हमारे कैलेंडर और त्योहारों का आधार हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे व्रत, त्योहार और शुभ मुहूर्त सटीक वैज्ञानिक गणनाओं से निर्धारित होते हैं। आज चंद्रयान और अन्य अंतरिक्ष कार्यक्रम हमारे प्राचीन वैज्ञानिक विरासत की आधुनिक अभिव्यक्तियां हैं, जहां परंपरा और प्रौद्योगिकी साथ-साथ आगे बढ़ते हैं।”

उन्होंने कहा, “जब भारत चंद्रयान (चंद्र मिशन), मंगलयान (मंगल मिशन) और आदित्य-एल1 (सूर्य मिशन) जैसे मिशन लॉन्च करता है, तो यह केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं होती, बल्कि उस प्राचीन भावना की आधुनिक अभिव्यक्ति भी होती है, जो हमेशा हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही है।”

उन्होंने कहा, “जब हम अंतरिक्ष में उपग्रह भेजते हैं, तो हम साथ ही अपनी वैज्ञानिक संस्कृति को भी आगे बढ़ा रहे होते हैं।”

राष्ट्रीय सुरक्षा को आमतौर पर हथियारों, तकनीक और सैनिकों की शारीरिक शक्ति से जोड़कर देखे जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “ये सभी महत्वपूर्ण हैं, इसमें कोई संदेह नहीं। लेकिन यदि आप गहराई से देखें, तो वास्तविक सुरक्षा केवल बाहरी शक्ति से नहीं आती। सच्ची सुरक्षा एक मजबूत राष्ट्रीय चेतना से आती है। भय पर आधारित समाज लंबे समय तक वास्तव में सुरक्षित नहीं रह सकता। केवल निडर समाज ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। यह निडरता शारीरिक शक्ति से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक मूल से आती है।”

उन्होंने कहा कि एक ओर सैनिक संकट के समय शिव की भावना से मानवीय सहायता प्रदान करते हैं, वहीं आवश्यकता पड़ने पर ‘रुद्र’ की तीव्रता के साथ ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियान को अंजाम देते हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे सैनिकों के भीतर की भावना हमारी संस्कृति से आती है, भगवान शिव की प्रेरणा से आती है।”

उन्होंने ईशा फाउंडेशन द्वारा पहली बार स्थापित “भव्य भारत भूषण” पुरस्कारों का भी उल्लेख किया, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी, कला, इतिहास और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए दिए गए।

उन्होंने कहा, “आज इन क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के साथ-साथ हमारी सशस्त्र सेनाओं की तीन संस्थाओं को भी ऑपरेशन सिंदूर की उल्लेखनीय सफलता के लिए सम्मानित किया गया। ये हैं वेस्टर्न एयर कमांड, सेना की सदर्न कमांड और वेस्टर्न नेवल कमांड। व्यक्तिगत रूप से इससे मुझे अत्यंत खुशी और गहरा गर्व महसूस हुआ।”

उन्होंने कहा कि संस्कृति और विज्ञान को अक्सर एक-दूसरे से अलग माना जाता है, लेकिन भारत में ये हमेशा पूरक रहे हैं। “संस्कृति केवल अनुष्ठानों का समूह नहीं है, यह हमारा जीवन जीने का तरीका है,” उन्होंने कहा।

काशी और तमिलनाडु के बीच संबंध को बहुत प्राचीन बताते हुए उन्होंने कहा, “एक ओर काशी दुनिया के सबसे प्राचीन जीवित शहरों में से एक है, वहीं दूसरी ओर तमिल संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृतियों में गिनी जाती है। भाषा, संस्कृति और भोजन के मामले में तमिलनाडु अत्यंत समृद्ध और ऐतिहासिक रूप से गहराई से जुड़ा हुआ है। मेरे लिए तमिलनाडु की इस पवित्र भूमि पर आना आशीर्वाद जैसा है। मैं यहां अतिथि के रूप में नहीं, बल्कि एक साधक और आध्यात्मिक व्यक्ति के रूप में आया हूं।”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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