प्रयागराज, 16 फरवरी (PTI) — इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोडीन आधारित कफ सिरप रैकेट से जुड़े मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि निर्धारित सीमा से अधिक कोडीन युक्त दवाएं एनडीपीएस एक्ट के तहत आती हैं।
न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने 3 फरवरी के अपने आदेश में अब्दुल कादिर और एक अन्य आरोपी को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि उनके पास से अवैध रूप से डायवर्ट की गई कोडीन आधारित कफ सिरप की भारी मात्रा बरामद हुई है।
अदालत ने कहा, “छूट (एक्सेम्प्शन) संबंधी प्रावधानों का कड़ाई और शाब्दिक रूप से पालन किया जाना आवश्यक है। जिन शर्तों पर छूट दी गई है, उनका सख्ती से पालन होना चाहिए। किसी भी शर्त के उल्लंघन पर छूट का दावा नहीं किया जा सकता।”
अदालत ने आगे कहा कि इस मामले में अवैध रूप से डायवर्ट की गई कोडीन आधारित कफ सिरप की भारी मात्रा बरामद हुई है, जिससे ‘थेरेप्यूटिक प्रैक्टिस में स्थापित’ होने की शर्त का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है।
आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धाराएं 8/21 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 318(4), 338, 336(3) और 340 के तहत रामपुर जिले के कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया था।
उनके पास से 119 बक्सों में 11,885 बोतल कोडीन आधारित कफ सिरप बरामद की गई थीं, जिन्हें वे कार में लोड कर रहे थे।
अदालत में यह दलील दी गई कि आरोपी लाइसेंसधारी दवा विक्रेता हैं और उन्होंने वैध बिल के जरिए कफ सिरप खरीदी थी। साथ ही कहा गया कि उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और ड्रग इंस्पेक्टर को सैंपल लेने और सील करने का अधिकार नहीं था।
अदालत ने कहा कि ‘कोडीन’ (मेथाइलमॉर्फिन) और उसके लवणों को 14 नवंबर 1985 की केंद्र सरकार की अधिसूचना में निर्मित मादक दवा के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल वही कोडीन छूट के दायरे में आती है जो चिकित्सीय उपयोग में हो, एक खुराक में 100 मिलीग्राम से कम हो और अविभाजित तैयारी में 2.5 प्रतिशत से अधिक सांद्रता न हो।
अदालत ने माना कि आरोपियों ने अधिसूचना में दी गई छूट की शर्तों का उल्लंघन किया है और वे इसका लाभ लेने के पात्र नहीं हैं।
11,885 बोतल कफ सिरप की बरामदगी का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा, “आरोपियों को झूठा फंसाने का कोई कारण नहीं दिखता। इस स्तर पर उन्हें जमानत पर रिहा करने का कोई उचित आधार नहीं है।”
अदालत ने यह भी कहा कि बचाव पक्ष की दलीलें मामले के गुण-दोष से संबंधित हैं, जिन पर जमानत पर विचार करते समय निर्णय नहीं लिया जा सकता। इस चरण पर अदालत यह राय नहीं बना सकती कि आरोपियों ने अपराध नहीं किया है।
वर्ग: ब्रेकिंग न्यूज
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