ईडी ने लुधियाना के उद्योगपति की डिजिटल गिरफ्तारी मामले में संपत्तियां कुर्क कीं

Ranchi: Central Industrial Security Force (CISF) personnel outside the Enforcement Directorate (ED) office amid the Ministry of Home Affairs' nationwide security enhancement for ED establishments following threat assessments, in Ranchi, Thursday, Jan. 15, 2026. (PTI Photo)(PTI01_15_2026_000294B)

नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने लुधियाना के प्रसिद्ध उद्योगपति एस पी ओसवाल की डिजिटल गिरफ्तारी से जुड़ी मनी लांड्रिंग जांच के तहत मंगलवार को एक खच्चर बैंक खाते में जमा 1.76 करोड़ रुपये की राशि कुर्क की।

बयान में कहा गया है कि यह कोष मृत्युंजय मल्टीट्रेड नाम की ‘खच्चर “इकाई में से एक के बैंक खाते में पड़ा था और इस बैंक खाते का उपयोग डिजिटल गिरफ्तारी जैसे विभिन्न साइबर-अपराधों से उत्पन्न अपराध की आय को प्राप्त करने और रूट करने के उद्देश्य से किया गया था।

लुधियाना में पंजाब पुलिस ने इस धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था, जिसका ईडी ने संज्ञान लिया था।

एजेंसियों के अनुसार, वर्धमान समूह के अध्यक्ष ओसवाल को अगस्त, 2023 में धोखेबाजों द्वारा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों के रूप में प्रतिरूपण करके डिजिटल गिरफ्तारी के तहत रखा गया था और उन्होंने उससे 7 करोड़ रुपये की “जबरन वसूली” की थी।

जांच में पाया गया कि कई खच्चर बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराध की आय को सफेद करने के लिए किया गया था और इन खातों को ऋण की व्यवस्था करने या रोजगार प्रदान करने के झूठे वादों के साथ “आर्थिक रूप से कमजोर” व्यक्तियों को प्रेरित करके खोला गया था।

ईडी ने 2025 में इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

म्यूल खातों का उपयोग वित्तीय अपराधों से उत्पन्न अवैध धन को निकालने के लिए किया जाता है और वास्तविक मालिक इसका उपयोगकर्ता नहीं होता है। ऐसे खाते नकली या किराए पर लिए गए केवाईसी का उपयोग करके बनाए जाते हैं जहां कोई व्यक्ति कुछ कमीशन के बदले अपने खाते को उधार देता है।

डिजिटल गिरफ्तारी साइबर अपराध के उदाहरण को दिया गया नाम है जहाँ अपराधी पुलिस/जांच एजेंसी के अधिकारियों का प्रतिरूप बनाते हैं और पीड़ितों से गिरफ्तारी या अभियोजन के परिणामों की धमकी देते हुए पैसे वसूलते हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में डिजिटल गिरफ्तारी वैध नहीं है और जो लोग इस तरह के अपराध का सामना करते हैं, उन्हें तुरंत स्थानीय पुलिस की मदद लेनी चाहिए और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। पीटीआई एनईएस एनबी एनबी

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