उत्तर प्रदेश में अंतर-राज्य लकड़ी तस्करी का रैकेट पकड़ा गया; 500 क्विंटल ‘खैर’ की लकड़ी जब्त

Wood (Representative image)

रामपुर (यूपी), 18 फरवरी (PTI) – उत्तर प्रदेश के रामपुर वन विभाग ने ‘खैर’ की लकड़ी की अवैध कटाई और परिवहन में लिप्त एक अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पंजाब से 500 क्विंटल से अधिक की मूल्यवान लकड़ी जब्त की गई और तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, अधिकारियों ने बुधवार को बताया।

रामपुर के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) प्रणव जैन ने कहा कि यह जब्ती, जिसकी कीमत 50 लाख रुपये से अधिक है, उत्तर प्रदेश से बाहर ले जाई गई इतनी बड़ी मात्रा में अवैध खैर लकड़ी के पुनः बरामद होने का पहला मामला है।

‘ऑपरेशन खैर’ नामक इस अभियान में राज्य सीमाओं के पार तस्करी की जा रही लकड़ी वाहनों की आवाजाही पर तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी का उपयोग किया गया।

उत्तराखंड की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के तराई जंगलों में पाए जाने वाले खैर की लकड़ी से ‘कट्ठा’ तैयार किया जाता है, जो पान मसाला और गुटका का मुख्य घटक है। इसकी उच्च वाणिज्यिक कीमत के कारण इसे अक्सर अवैध कटाई और अन्य राज्यों में तस्करी के लिए वन माफियाओं का निशाना बनाया जाता है।

जैन ने बताया कि वन विभाग ने कई दिनों से इस रैकेट की निगरानी की और तस्करी की गई लकड़ी के मार्ग का पता लगाने के लिए सूचना देने वालों और तकनीकी ट्रैकिंग विधियों पर भरोसा किया।

उन्होंने कहा, “हम केवल स्रोत ही नहीं बल्कि गंतव्य का भी पता लगाना चाहते थे। लगातार मिली सूचनाओं और तकनीकी निगरानी के आधार पर, हमने खैर की लकड़ी से भरी एक गाड़ी को ट्रैक किया और इसे रात भर पंजाब तक फॉलो किया।”

टीम पंजाब के पटियाला शहर के राजपुरा इलाके में पहुंची, जहां बड़ी मात्रा में खैर की लकड़ी संग्रहीत और संसाधित हो रही थी। साइट से लगभग 450-500 क्विंटल लकड़ी जब्त की गई। उन्होंने बताया कि लकड़ी की बाजार कीमत लगभग 10,000 रुपये प्रति क्विंटल है।

DFO ने कहा कि तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और तस्करी में उपयोग की गई तीन गाड़ियां जब्त कर ली गई हैं। एक और संदिग्ध की तलाश की जा रही है।

प्रारंभिक जांच में पता चला कि लकड़ी को छीलकर जम्मू भेजा जाना था।

जैन ने कहा कि वन विभाग के संसाधन सीमित होने के बावजूद इस अभियान ने दिखाया कि निरंतर निगरानी और रणनीतिक तकनीकी उपयोग से संगठित तस्करी नेटवर्क को तोड़ा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि खैर एक संवेदनशील प्रजाति है और सीमित वन क्षेत्रों में ही पाई जाती है, जिससे यह अवैध कटाई के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है। विभाग ने पहले स्थानीय स्तर पर जब्ती और गिरफ्तारियां की थीं, लेकिन बड़ा नेटवर्क सक्रिय बना रहा।

उन्होंने कहा, “इस बार ध्यान स्रोत से आगे के अंतिम उपयोग और आपूर्ति श्रृंखला को ट्रैक करने पर था। पूरी टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में समन्वय के साथ एक योजनाबद्ध अभियान के तहत काम किया, जिससे यह बड़ी बरामदगी हुई।”

अधिकारीयों ने कहा कि तस्करी नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उनके स्थानीय साथी की पहचान के लिए आगे की जांच जारी है।

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