
जम्मू, 18 फरवरी (पीटीआई) Jammu and Kashmir का वित्त वर्ष 2024-25 में कुल कर्ज 1,37,067 करोड़ रुपये आंका गया है, जो केंद्र शासित प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 48 प्रतिशत है। इस दौरान जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि होकर यह 2,88,422 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह जानकारी मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने बुधवार को दी।
अपनी सरकार की वित्तीय प्रबंधन रणनीति का बचाव करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में वृद्धि से कर्ज-से-जीडीपी अनुपात को मौजूदा वित्त वर्ष में 48 प्रतिशत तक लाने में मदद मिली है, जो एक वर्ष पहले 51 प्रतिशत था।
विधानसभा में लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने पिछले छह वर्षों के दौरान केंद्र शासित प्रदेश के कर्ज-से-जीडीपी अनुपात की प्रवृत्ति का विवरण दिया।
2019-20 में देनदारियां 89,037 करोड़ रुपये थीं, जो उस वर्ष के 1,64,103 करोड़ रुपये के जीएसडीपी का 54 प्रतिशत थीं।
उन्होंने कहा कि 2020-21 में देनदारियां बढ़कर 98,244 करोड़ रुपये हो गईं और कर्ज-से-जीडीपी अनुपात 59 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण कोविड महामारी के दौरान आर्थिक संकुचन था।
2021-22 में देनदारियां बढ़कर 1,06,753 करोड़ रुपये हो गईं, लेकिन आर्थिक सुधार की रफ्तार बढ़ने से कर्ज-से-जीडीपी अनुपात घटकर 53 प्रतिशत रह गया।
एक वर्ष बाद 2022-23 में देनदारियां 1,09,825 करोड़ रुपये रहीं और अनुपात और घटकर 48 प्रतिशत हो गया। मुख्यमंत्री ने बताया, “2023-24 में देनदारियां बढ़कर 1,25,205 करोड़ रुपये हो गईं और अनुपात 51 प्रतिशत रहा।”
अब्दुल्ला ने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में देनदारियां 1,37,067 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि जीएसडीपी बढ़कर 2,88,422 करोड़ रुपये हो गया है, जिससे कर्ज-से-जीडीपी अनुपात फिर से घटकर 48 प्रतिशत हो गया है।
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि वर्षों में वित्तीय स्थिरता में सुधार हुआ है और आर्थिक वृद्धि ने बढ़ते कर्ज के प्रभाव को संतुलित करने में मदद की है।
अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि उधार ली गई राशि का उपयोग गैर-उत्पादक खर्चों में न हो।
उन्होंने कहा, “धन का एक बड़ा हिस्सा पूंजीगत व्यय, अवसंरचना विकास, विद्युत क्षेत्र सुधार और परिसंपत्ति निर्माण में लगाया गया है, जिससे दीर्घकालिक विकास क्षमता मजबूत हुई है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि समीक्षा अवधि के दौरान पूंजीगत व्यय लगातार सड़कों, बिजली ढांचे, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य उत्पादक क्षेत्रों को समर्थन देता रहा।
उन्होंने यह भी कहा कि उधारी को राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) ढांचे की निर्धारित सीमाओं के भीतर रखा गया, जिसमें संतुलित बाजार उधारी, बेहतर नकद प्रबंधन और विकास से जुड़े खर्चों को प्राथमिकता दी गई।
अब्दुल्ला ने कहा, “यह चिंता कि बढ़ता आंतरिक कर्ज बिना उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण के हुआ है, आंकड़ों से साबित नहीं होती।” उन्होंने जोड़ा, “कर्ज-से-जीडीपी अनुपात में सुधार और निरंतर पूंजी निवेश जिम्मेदार वित्तीय प्रबंधन को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।”
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