
नई दिल्ली, 18 फरवरी (पीटीआई) Supreme Court of India ने बुधवार को अपने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि राज्य बार काउंसिल चुनावों से संबंधित किसी भी याचिका को सूचीबद्ध न किया जाए और असंतुष्ट पक्षों से कहा कि वे अपनी शिकायतों के समाधान के लिए शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त समिति का रुख करें।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य बार काउंसिल चुनावों की निगरानी के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में ‘हाई-पावर्ड इलेक्शन सुपरवाइजरी कमेटी’ का गठन किया था।
न्यायमूर्ति धूलिया के अलावा समिति में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि शंकर झा और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि भी शामिल हैं।
समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शीर्ष अदालत ने पहले आदेश दिया था कि देशभर में सभी राज्य बार काउंसिल चुनाव सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीशों की निगरानी में कराए जाएं, जिसकी अंतिम समयसीमा 31 जनवरी, 2026 निर्धारित की गई है।
हालांकि, नामों की विलोपन, चुनाव में कथित अनियमितताओं और समयसीमा बढ़ाने जैसे विभिन्न मुद्दों को लेकर बड़ी संख्या में याचिकाएं शीर्ष अदालत में दायर की जा रही हैं।
बुधवार को न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की सदस्यता वाली पीठ ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि राज्य बार काउंसिल से संबंधित कोई नई याचिका स्वीकार न की जाए और ऐसे मामलों को न्यायमूर्ति धूलिया समिति के पास निस्तारण और उपचारात्मक उपायों के लिए भेजा जाए।
दिसंबर 2025 में पीठ ने राज्य बार काउंसिलों में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व को “गैर-समझौताकारी” बताते हुए अनिवार्य किया था और निर्देश दिया था कि किसी भी कमी को सह-चयन (को-ऑप्शन) के माध्यम से पूरा किया जाए।
अदालत ने दिव्यांग वकीलों की भागीदारी बढ़ाने की पहल का भी समर्थन किया, जिसके तहत Bar Council of India ने ऐसे उम्मीदवारों के लिए नामांकन शुल्क कम करने पर सहमति दी।
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