
दुबई, 19 फरवरी (एपी) — ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता अनिश्चितता में लटकी हुई है, ऐसे में दोनों देशों ने गुरुवार को सैन्य शक्ति प्रदर्शन (गनबोट कूटनीति) का सहारा लिया। तेहरान ने रूस के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास किया, जबकि अमेरिका ने एक और विमानवाहक पोत को मध्य-पूर्व के करीब तैनात कर दिया।
ईरानी अभ्यास और भूमध्य सागर के मुहाने के पास अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड की मौजूदगी दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है।
इस सप्ताह की शुरुआत में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में लाइव फायर अभ्यास भी किया था। फारस की खाड़ी के इस संकरे मार्ग से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल व्यापार गुजरता है।
अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों की अतिरिक्त तैनाती का मतलब यह नहीं कि अमेरिका निश्चित रूप से ईरान पर हमला करेगा, लेकिन इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ऐसा करने का विकल्प मिल जाता है।
ट्रंप ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या और बड़े पैमाने पर फांसी के मामलों पर “रेड लाइन” तय करने के बावजूद अब तक ईरान पर हमला नहीं किया है। जून में ईरान-इजराइल युद्ध के कारण बाधित हुई परमाणु वार्ता को उन्होंने फिर से शुरू किया है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “यदि ईरान समझौता नहीं करता है, तो अमेरिका को संभावित हमले को समाप्त करने के लिए डिएगो गार्सिया और फेयरफोर्ड स्थित एयरफील्ड का उपयोग करना पड़ सकता है।” यह बयान उन्होंने चागोस द्वीपसमूह के भविष्य को लेकर ब्रिटेन पर दबाव बनाने के संदर्भ में दिया।
इसी बीच, ईरान में पिछले महीने हुए विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए लोगों के 40वें दिन पर आयोजित शोक सभाओं में भी कुछ जगह सरकार विरोधी नारे लगे, जबकि प्रशासन ने चेतावनी दी थी।
रूस के साथ ईरान का सैन्य अभ्यास
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, गुरुवार को ईरानी बलों और रूसी नौसैनिकों ने ओमान की खाड़ी और हिंद महासागर में संयुक्त अभ्यास किया। इसका उद्देश्य “संचालन समन्वय को उन्नत करना और सैन्य अनुभवों का आदान-प्रदान” बताया गया।
पिछले वर्षों में “सिक्योरिटी बेल्ट” नामक इस अभ्यास में चीन भी शामिल रहा था, लेकिन इस बार उसकी भागीदारी की पुष्टि नहीं हुई। हाल के दिनों में रूसी स्टेरेगुश्ची-श्रेणी का एक युद्धपोत ईरान के बंदर अब्बास सैन्य बंदरगाह पर देखा गया था।
ईरान ने क्षेत्र में पायलटों के लिए रॉकेट फायर चेतावनी भी जारी की, जिससे संकेत मिलता है कि अभ्यास के दौरान जहाज-रोधी मिसाइलें दागी जा सकती हैं।
इधर, ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार अमेरिकी विमानवाहक पोत फोर्ड बुधवार दोपहर मोरक्को तट के पास अटलांटिक महासागर में था। वह जिब्राल्टर से होकर पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात हो सकता है, जहां उसके साथ निर्देशित मिसाइल विध्वंसक भी होंगे।
ऐसी तैनाती से इजराइल और जॉर्डन को संभावित संघर्ष की स्थिति में अतिरिक्त वायु और मिसाइल रक्षा सहायता मिल सकती है। इससे पहले गाजा में इजराइल-हमास युद्ध के दौरान भी अमेरिका ने इसी तरह युद्धपोत तैनात किए थे।
शोक सभाओं में सरकार विरोधी नारे
पिछले महीने विरोध प्रदर्शनों में मारे गए लोगों की 40वीं बरसी पर शोक सभाएं बढ़ी हैं। ईरान में परंपरा है कि किसी की मृत्यु के 40 दिन बाद श्रद्धांजलि दी जाती है।
तेहरान के विशाल बहेश्त-ए-ज़हरा कब्रिस्तान में आयोजित कुछ सभाओं में लोगों ने राष्ट्रवादी गीत गाते हुए सरकार विरोधी नारे लगाए।
28 दिसंबर को तेहरान के ऐतिहासिक ग्रैंड बाजार में ईरानी मुद्रा रियाल के पतन के विरोध में प्रदर्शन शुरू हुए थे, जो बाद में पूरे देश में फैल गए। 8 जनवरी को निर्वासित शहजादे रजा पहलवी के आह्वान पर प्रदर्शन तेज हो गए।
ईरानी सरकार ने अब तक हिंसा में 3,117 लोगों की मौत की पुष्टि की है। हालांकि अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी का दावा है कि मृतकों की संख्या 7,000 से अधिक हो सकती है और कई और लोगों के मारे जाने की आशंका है।
